GURUJI VACHAN

गुरुजी के 105 वचन जो उन्होंने समय समय पर कहे । आज भी ये वचन हमारा मार्गदर्शन करते हैं ।
गुरु जी के वचन
1.गुरुजी हमेशा इस दैवीय गद्दी पर रहेगे | उन्होंने कहा मै था,मै हूँ और मै हमेशा रहूँगा | मेरा कोई वारिस नही है
2 मेरे लिए मेरा परिवार भी संगत ही है और किसी के पास कोई रूहानी शक्ति नही है |
3 मै अपने भक्तों से बहुत प्यार करता हूँ और उनका बुरा वक्त खत्म करता हूं |
4 जब आप अपने जूते मंदिर के बाहर उतारते हो तो अपनी बुद्धि भी बाहर ही छोड कर आया करो, वो मेरे सामने किसी काम की नही है |
5 मेरी उपस्थिति मे सेलफोन का प्रयोग मत करो वरना तुम्हारा आशीर्वाद उसे चला जायगा जिस से आप बात करोगे |
6 अगर आप अपनी ज़िन्दगी की लगाम मुझे सौप देते हो तो मै तुम्हे सीधा मोक्ष तक ले जाता हूँ ।
7 अगर किसी घर से सिर्फ एक सदस्य भी मेरे पास आ जाता है तो पूरे परिवार को आशीर्वाद मिल जाता है |
8 सिर्फ किताब से पाठ करना ही पाठ नही होता, अपना काम करना,नित नियम करना और अपने परिवार का ध्यान करना भी पाठ करना होता है |
9 सबसे बडा पाठ तब होता है जब पति पत्नी की और पत्नी पति की तथा दोनो मिलकर बच्चों की अच्छे से देखभाल करते है और घर मे शांति बनाए रखते है |
10 गुरुजी ने मुझे कहा और पीछे मुडकर किसी से कहा "चल भाई लता मंगेशकर दा गाना लगा" हम सुनने लगे. फिर गुरुजी ने कहा "किन्ना सोना गांदी है ना आशा भोसले ?" ऐसे मे कोई क्या कहता, हम चुप रहे | गुरुजी ने अपना प्रश्न फिर दोहराया मैने कहा जी गुरुजी (ये सोच कर की गुरुजी कहते है गुरुआ नु कोंटराडिक्ट नही करदे
11 "रब कदे वी नजर नही आन्दा”  गुरुजी ने कहा “मैनु त्वाडे विच नजर आन्दा है " तुम कभी भगवान को नही देख पाते, मैने कहा मुझे आप मे नजर आते है, और वो मुस्कुरा दिए |
12 "रब नु प्यार करो,ओदे कोलो डरो ना" गुरुजी |
भगवान ने ही तो संसार बनाया है, सोलर सिस्टम बनाया है और सब कुछ उस परम पिता परमेश्वर ने ही तो बनाया है इसीलिए भगवान से प्यार करो, भगवान से डरो मत |
13 महापुरुषों के ओहदे होते है और उनमे सबसे उपर सतगुरु होते है और वो मै हूँ | सिर्फ एक सतगुरु ही सबके मर्ज़ अपने उपर ले सकते है और उन्हें दुखो से मुक्त कर सकते है | हर कोई लोगो के मर्ज़ (बीमारियाँ) अपने उपर नही ले सकता है, उन्हें हुकम नही है, वो सिर्फ लोगो का मार्गदर्शन कर सकते है | ऐसा मनुष्य किस काम का अगर वो भगवान का शुकराना ना कर सके |
14 कभी किसी की देखा देखी अपनी चादर के बाहर पैर नही पसारने चाहिए |
15 पंडितों पर अन्धविश्वास नही करना चाहिए | अगर कोई ऐसा मिल गया जिसे पूरा ज्ञान नही है तो आपका नुकसान हो सकता है | मैने कहा की हम पंडितों के नही जाते तो गुरुजी ने कहा की मै आम बात कर रहा हूँ |
16 अपनी खुशहाली के लिए birth stone कभी मत पहनो,कोई पत्थर उलटा असर कर रहा हो तब क्या ? मैने गुरुजी से कहा कि हम चारो (मै, मेरे पति तथा दोनो बच्चे) ने कभी birth stone नही पहने | गुरुजी ने कहा की मै आम बात कर रहा हूँ |
17 गणेश जी का स्थान मंदिर में है ना की लोगों के घरों के फर्शों पर यां सजावटी समान की तरह और कई बार पेपर वेट की तरह|
18 आप सब करोड़ों रुपये खर्चा कर के अपने घरों को सजाने के लिए जो पेंटिंग्स ले आते हो, तुम्हे क्या पता अगर वो अपने साथ उस पेंटर की नेगेटिविटी भी तुम्हे दे रही हो | मैंने गुरुजी से कहा कि गुरुजी मेरी इतनी समर्थ नही है की मैं करोड़ों रुपये की पेंटिंग्स खरीद सकूँ तो उन्होने कहा "ओ हो मैं आम बात कर रहा हूँ |
19 अगर कोई दूर है और मेरे पास या बड़े मंदिर नही पहुँच सकता, वो मेरी फोटो से बात करे, मैं सबकी बात सुनता हूँ |
20. गुरुजी के वचनों पर आपस में तर्क-वितर्क करना माना है, उससे हम अपने भगवान प्राप्ति, अपने लक्ष्य से चूक जायेंगे |
21. गुरु जी ने इंग्लिश में कहा "only dead fish swim with the tide" एक मरे ज़मीर वाला इंसान ही दुनिया के ग़लत रास्ते पर चलता है | हमें ग़लत हालात से समझौता ना करके,सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए |
"self praise is no praise". अपनी बढाई आप नही करनी |
"health is your real wealth".  तुम्हारी असली दौलत सेहत है |
"keep your ego in control". अपने अहंकार को वश में करके रखो |
"life is not easy" I was told by Guruji, but prayer can sort out anything. "Those who pray are blessed". ज़िन्दगी आसान नही है | दुआ हर मसले का हल है |
"Too much of everything is bad" किसी भी चीज़ को बहुत ज़्यादा करना, अच्छा नही |
22. "डाक्टर अपना कम करन्गे मैं अपना". गुरुजी
जब कभी कोई परेशानी हो तो डाक्टर को अपना काम करने दो मैं अपना काम करूँगा |
23.दवाई तभी काम करेगी जब मैं उसे आशीर्वाद दूंगा |
24.पानी बहुत पिया करो, अगर डाक्टर ये सब बता दें तो उसके पास कौन जाएगा, पानी हर बीमारी की दवा है और सब रोग ठीक करता है |
25 पाचक-ग्रंथि एक ऐसा अंग है जिसकी प्रकिया भगवान ने अपने हाथ में रखी है |
26. बहुत अच्छे दर्शन हो रहे हैं अभी, बाद में मैं तारों जैसा नज़र आऊंगा, मंदिर में आने वाली संगत इतनी बढेगी की जितनी मर्ज़ी जगह बढा लो कम ही पड़ेगी |
एक समय वो भी था जब गुरुजी सबसे नही मिलते थे, जिससे वो मिलना चाहते उसे वो खुद बुला लेते थे  |
27.आने वाला समय बहुत खराब आ रहा है, जो प्रार्थना में विश्वास करेगा और पूरे मन से प्रार्थना करेगा वो ही बच पाएगा |
28. जिसे हम प्यार से गुरुजी का आश्रम (बड़े मंदिर) कहते हैं वहां आने से बारह तीर्थ स्थानों का पुण्य एक साथ मिलता है तथा मेरा आशीर्वाद भी मिलता है ऐसा गुरुजी का कहना था |
29.बड़े मंदिर में कभी भी सोना नही चाहिए, वरना गुरुजी का आशीर्वाद अधूरा रह जाता है |
30. गुरु को कभी चिट्ठी नही लिखनी चाहिए, हमेशा खुश रहा करो।जो होगा अच्छा ही होगा |
31 मैं हड्डी और माँस का इंसान बना सामने बैठा हूँ, लोगों ने इंसान ही समझ लिया |
32.  लोगों को बाद में समझ आएगी की मैं क्या हूँ
|33 मैंने बहुत कठिन तप किया है पत्तों पर निर्वाह (गुज़ारा) किया है, तुम्हे पता है कितना मुश्किल होता  है ? गुरु का स्थान इतना बड़ा होता है की अगर वो चाहे तो एक ही समय में वो कई जगह पर एक साथ उपस्थित हो सकते हैं |
34 मैं तुम्हे इंसान की तरह नज़र आता हूँ, पर मैं जहाँ खड़ा हूँ वहा से तुम सब मुझे छोटी छोटी चींटी जैसे नज़र आते हो |
35.मैं इस ससार में तुम्हे माफ़ करने ही तो आया हूँ |
36. मेरे पास इतनी शक्ति है की मैं सूरज को भी अपने अनुसार चला सकता हूँ |
37. सूरज अब बुढ्ढा हो चुका है |
38. धरती पर पानी बढ जायगा |
39. लोग पेड़ काटते हैं, अच्छी बात नही है |
40 मेरे पास आने वाला रास्ता आसान नही है
41 मैं नींबू की तरह निचोड़ लेता हूँ, तम्हारी हर तरह से परीक्षा लेता हूँ, अगर पूर्ण आत्म समर्पण नही करते तो फिर क्या फायदा ?
42.अगर कोई मेरी तरफ एक कदम भी बढता है तो मैं उसकी तरफ सौ कदम बढता हूँ |
43 लंगर और चाय प्रसाद तो तुम्हारी दवाई है और सब रोगों को ठीक करते हैं । इन्हें प्रसाद की तरह देखो,ना की इन्हे बनाने वाले पदार्थों की तरह | लंगर और चाय प्रसाद तो तुम व्रत में भी खा सकते हो | जब किसी परिवार का कोई एक सदस्य भी लंगर और चाय प्रसाद ख़ाता है तो, घर के बाकी सदस्य चाहे घर पर हों या अस्पताल में, सब को मेरा आशीर्वाद मिलता है |
44 लंगर और चाय प्रसाद में मेरा आशीर्वाद होता है उसे यही (बड़े मंदिर) पूरा खाना चाहिए, कछ बचना नही चाहिए |  अगर उसे यहाँ खाओ तो दवाई है। घर ले जाओ तो मिठाई है।
45 लंगर प्रसाद को दोबारा गरम नही करना चाहिए |
46 मेरे आशीर्वाद देने के बड़े तरीके हैं, उनमे से एक सत्संग करना भी है, जो बोलता है उसका भी भला होता है और जो उस सत्संग को सुनता है उसका भी भला होता है | जब आप अपने गुरु के द्वारा किये कल्याण को सब को सुनाते हो तो आप भी आशीर्वाद पाते हो और सुनने वाला भी आशीर्वाद पाता है | कभी कभी तो गुरुजी हमें दूर रख कर भी आशीर्वाद देते हैं |
47 गुरुजी कब और क्या कल्याण करते हैं ज़रूरी नही है कि हमें पता हो |
48. ऐसा गुरु मिलेगा कहीं, मैं प्रवचन में विश्वास नही करता हूँ, सब कल्याण वास्तव में कर के दिखाता हूँ |
49. सबसे अच्छे  रंग जो सकारात्मकता (पाजिटिविटी) और समृद्धि पैदा करते हैं वो हैं लाल, क्रीम और काला, और इनके बाद आते हैं केसरिया, संतरी, गलाबी, पीला, हरा, जामनी और सफ़ेद | गूढ़ नीला रंग गुरुओ का रग नही होता, इसे इस्तेमाल नही करना  चाहिए, ये पहनने वाले को नकारात्मकता और भ्रांतियां पैदा करता है | फिरोजी,आसमानी और नेवी ब्लू रंग अच्छे होते हैं, ये इस्तेमाल कर सकते हैं | मैंने पूछा क्या ये आपने मेरी परिवार के लिए कहा है तो गुरुजी का जवाब था,"जो सुन ले उसका भला" |
50 आप को अपने आँख, नाक, कान सब चेहरे पर आगे मिले हैं पीछे नही, इस बात का भगवान को बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहिए |
51 जानवर कितने काम करते हैं, मरने के बाद भी हम उनकी खाल से चमड़े के बेग, जुते, बेल्ट आदि बनाते हैं यहाँ तक की मरने के बाद उसे खा भी लेते हैं, पर इंसान मरने के बाद किसी काम का नही है इसीलिए इंसान अपने जीते जी सिर्फ पाठ करके अपना जन्म संवार सकता है | 
52 गुरुजी के अनुसार गुरुजी के वचन याद करना भी संगत करना होता है | अपने व्यक्तिगत अनुभव और आशीर्वाद जो आप को गुरुजी से मिले, उनके बारे में सब को बताना भी एक तरह से गुरुजी को शुकराना करना ही होता है | अक्सर गुरुजी कहते थे कि "मैंने जो तुम्हारे कल्याण किये हैं सब को बताओ" ।
53. अगर मैंने सिर्फ एक इंसान को भी भगवान तक पहुँचने के रास्ते पर डाला, तो मेरा काम हो गया समझो
54 अगर आपके काम अच्छे हैं तो दुनिया के सब सुख गुरुजी आपकी झोली में डाल देंगे |
55 कभी भी अपना बुरा नही मांगनी चाहिए, गुरुजी के साथ क्रय-विक्रय नही चलता जैसे आप मुझे ये दोगे तो मैं इतने का प्रसाद चढाऊंगा, हम अपने परम पिता परमेश्वर को कछ नही दे सकते, अगर हम सेवा भी करते हैं तो वो भी अपनी मदद ही करते हैं ना की गुरुजी की |
56. एक बार एक छोटे पाठी (गरुद्वारे में ग्रन्थ साहब का पाठ करने वाले) ने गुरुजी से कहा की उसकी ज़िन्दगी में कछ भी ठीक नही है, पैसे नही हैं | गुरुजी ने जवाब दिया" जद लोका दे पाठ पढदा हैं किन्ने सफे पलट जानदा हैं" | (जब लोगों के लिए पाठ पढता है तो कितने पन्ने बिना पढे पलटता है) पाठी लोगों के लिए पाठ पढता था तो बीच में कई  पन्ने बिना पढे ही पलट जाता  था | फिर गुरुजी ने हमारी तरफ देखा और कहा "आपे पाठ किता करो" यानी पाठ अपने आप करना चाहिए किसी दूसरे के उपर निर्भर नही रहना चाहिए |
57 लोग बेटा तो मांग लेते हैं, पर अगर वो मानसिक रूप से विक्षिप्त पैदा हो गया तो ?
58 अगर आपको किसी ग़रीब या काम करने वालों को कुछ खाना देना है तो उत्सव शुरू होने से पहले उनके लिए निकाल लें ना कि बाद का बचा जूठा उन्हें दें |
59 अगर कोई भिखारी आपसे कुछ मांगता है पर आप कुछ नही दे पा रहे तो, हाथ जोड़ लें, ना जाने किस भेस में कौन आप के सामने खड़ा हो |
60 अपने घर में कोई भी मूर्तियाँ ना रखा करो जैसे घोड़ा, पक्षी, इंसान | इन्हे पानी में बहा दो यां पानी ना मिले तो ऐसे ही फैंक दो पर घर में मत रखो | घर को सजाना है तो फूलों से सजाओ |
61 गुरुजी एक बार एक दर्जी के पास अपने लिए पेंट सिलवाने गये तो दर्जी ने जेबों के लिए पूछा | गुरुजी ने हँस कर कहा "सानु बोज़या दी की लोढ़" यानी मुझे जेबों की क्या ज़रूरत है | गुरुजी पहले पेंट पहना करते थे पर बाद में उन्होने चोला पहनना शुरू कर दियाकिसी ने पूछा तो हँस कर कहा "ओय कोई गुरु मन्दा ही नही सी" यानी पेंट पहनने पर कोई गुरु मानता ही नही था |
62 कभी भी किसी की निंदा मत करो ऐसा करने से आपका आशीर्वाद उसे हस्तांतरित हो जाता है और उसकी नकारात्मक कमाई आपकी झोली में आ जाती है |
63 कभी दूसरों के दुःख मत सुनो,जब भी कोई आप के सामने अपनी व्यथा कहने की कोशिश करे उनसे कहो, गुरुजी के पास जाओ,वही सब ठीक करेंगे | सुनो मत अन्यथा वे अपनी नकारात्मकता आप को दे कर आपका आशीर्वाद ले जायेंगे |
64  दूसरे आपके बारे में क्या कहते हैं, इस बात से प्रभावित होने के स्थान पर अपने नियंत्रण मे रहना सीखो |
65 प्रार्थना और पाठ हमेशा इतनी शांति से करना चाहिए की आप के आस-पास बैठे किसी को पता भी नही चले की आप पाठ कर रहे हो | इसी तरह दान भी गुप्त होना चाहिए की एक हाथ को पता ना चले दूसरे ने कुछ दिया है |
66 घर में नागफनी तथा बोनसाई जैसे ना बढने वाले पौधे नहीं रखने चाहिए |
67 अगर सेवा के पीछे कोई अप्रत्यक्ष स्वार्थ छुपा है, तो वो निस्वार्थ सेवा नही है, असल सेवा बिना किसी मांग तथा स्वार्थ के होती है |
68. अगर अपने दैनिक कामों को करने से किसी का भला हो जाता है तो क्या फर्क पड़ता है ?
69 जो वास्तविक गुरु होते हैं वह हमेशा अपनी पहचान गुप्त रखते हैं, और जो आगे बढ बढ कर अपने बारे में खुद ही बताते हैं वह सच्चे गुरु नही होते |
70. "एक बार हम गुरुजी के साथ रात के 2 बजे तक बैठे थे और गुरदास मान जी का गाना "रातों को उठ उठ कर" चल रहा था और तब हम पता लगा की गुरुजी हमारे लिए कितनी प्रार्थना, कितना तप करते हैं ताकि हम रातों को शांति से सो सकें | गुरुजी कभी नही सोते थे, वे निरंतर पाठ करते रहते थे |
71 गुरुजी के शरीर से निकलने वाली खुशबु, उनकी इच्छा के अनुसार निकलती थी | गुरुजी के अनुसार ये भी एक तरह का प्रशाद था जिसे पाने वाला उसे कही भी पा सकता था मंदिर में भी और घर बैठे भी |
72. गुरुजी ने एक बार कहा "की खाओगे? टमाटर विच वी स्प्रे है" गुरुजी
खाने पीने की वस्तओ के दूषित तथा संदूषण की वजह से परेशान रहते थे ।
73. गुरुजी = "गुर बानी दे टप्पे सुन्दे हो?" (गरु वाणी के शब्द सुनते हो?) मैने जवाब दिया "हांजी गुरुजी कदी कदी" (हाँ गुरुजी कभी कभी) गुरुजी = "समझ आन्दे ने ?" (समझ आते हैं?)  मैने कहा "जी थोड़े थोड़े" (जी थोड़े थोड़े) गुरुजी = "सुन्या करो, चन्गे होंदे ने" (सुना करो अच्छे होते हैं)
74 जब भी मैं आप से  नृत्य करवाता हूँ तो आपके शरीर का पूरा खांचा (X_Ray)  मेरे सामने खीच जाता है और जहाँ भी कोई कमी या खराबी होती है मैं ठीक करता हूँ |
75. गुरुजी हमेशा संगत से "शिव पुराण" पढने के लिए कहते थे |
76 ज्यादा पैसा अच्छा नही होता, भगवान से हमेशा प्रार्थना करनी चाहिए की इतना दीजिये जितना मेरे परिवार के लिए पूरा हो |
77 गुरु के सामने प्रार्थना कर के अपने कर्मों की माफी मांग लेनी चाहिए, उन कर्मों की भी जो आपको नही पता की आपने कुछ ग़लत कर दिए हैं |
78 आपका अपने गुरु के लिए प्यार ऐसा होना चाहिए की सोते, जागते और अपने दैनिक कामों को करते हुए भी आप अपने गुरु को ही याद करते हों |
79. एक दिन मैंने गुरुजी से पूछा "मोक्ष मिलदा है"(क्या कभी मोक्ष मिलता है) गुरुजी ने जवाब दिया "जे चंगे कम करो ता" (हाँ मिलता है अगर अच्छे और मानवता के काम करो तो)
80. "मैं एक रसिक बैरागी हूँ जो तुम्हे पारिवारिक उत्तरदायित्व निर्वाह के साथ साथ प्रार्थना के मार्ग पर चलना सिखलाता है"
81 मैं सृष्टि के कामों में कभी हस्तक्षेप नही करता, लेकिन अगर कभी गुरु अपने किसी भक्त पर मेहरबान हो जाए तो सृष्टि का लिखा मिटा कर नया लेख भी लिख सकते हैं |
82 गुरु जो बात कह देते हैं वो पत्थर की लकीर की तरह है, जो कहा है वो होना ही है |
83 दुःख भरे गाने, सीरियल और फिल्म नही सुनने और देखनी चाहिए |
84 गुरुजी किसी इंसान का मंगलिक होना बेकार के वहम हैं |
85. "नॉन वेज नही खाओगे ते चन्गे रहोगे" - गुरुजी
शाकाहारी रहोगे तो सुखी रहोगे |
86 घर का बना खाना ही सबसे अच्छा होता है, बाहर ज्यादा नहीं खाना चाहिए |
87 आत्महत्या करना महापाप होता है |
88. जब गुरुजी से किसी अन्य पवित्र धार्मिक स्थान के बारे में पूछा गया तो उन्होने कहा "अजमेर शरीफ सच्चा और पवित्र धार्मिक स्थल है" |
89. एक बार गुरुजी से किसी स्त्री गुरु के बारे में पूछा गया तो उन्होने कहा "औरत कदी गुरु नही हो सकदी" (औरत कभी भी गुरु नही बन सकती)
90 जब भी आप कोई हीरे की वस्तु पहनने का मन बनाते हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला हीरा ही पहनना चाहिए, क्योंकि उसका पहनने वाले पर असर होता है |
91 मैं किसी राजनैतिक पार्टी से सम्बंधित नही हूँ |
92 -  गुरुजी का आदेश था की चढाए हए फूल नही लेने चाहिए, और अगर मिल जाए तो घर जाते हए नदी में बहा देने चाहिए |
93 सलवार कमीज़ सबसे अच्छी पोशाक होती है, साड़ी से भी अच्छी |
94 सब के पास अपना पूरा घर होता है, पर रहने के लिए सिर्फ एक कमरे की ही आवश्यकता होती है |
95. ताम्बे के लोटे के बारे में गुरुजी ने कहा ये अपनी कमाई से खरीदना चाहिए ।
96 सिर्फ मेरी फोटो से ताम्बे का लोटा छुआ देने से वो अभिमंत्रित हो जाता है | ताम्बे के लोटे को कभी साबुन इत्यादि से नही साफ करना चाहिए | रोज़ रात को नींबू या राख से धो कर पानी से भर कर रख देना चाहिए और सुबह सबसे पहले वही पानी पीना चाहिए |
97 बच्चों पर पढाई का बहत ज़्यादा भार नही डालना चाहिए, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार ही पढने देना चाहिए | 
98 ये कलयुग है, इस युग में भगवान बहत शीघ्र और आसानी से मिल जाते हैं | उन्हे पाने के लिए कठिन तप करने यां पेड़ से उल्टे लटकने की ज़रूरत नही है | बस प्रार्थना करो और भगवान का शुकराना करो |
99. गुरुजी को "फेंग शुई" पर कभी विशवास नही था |
100. गुरुजी के शरीर से एक खुशबु निकलती थी | उन्होने बताया की ये बरसों के तप से होता है।अपने अन्दर का एक ऐसा स्वर्ग जिसे "सचखण्ड" भी कहा जाता है |
101. गुरुजी की नज़र में कोई नई संगत या पुरानी संगत जैसा कुछ नही था, सब एक बराबर थे | उनका कहना था की मेरे साथ कितने वर्ष का साथ है कभी मत गिनो क्योंकि सिर्फ उन्हे पता है की हम उनके साथ कितने जन्मों से जुड़े हुए हैं | गुरुजी भूत, वर्तमान और भविष्य, सब देख सकते थे और उनसे कछ भी नही छुपा हआ था | गुरुजी किसी को भी ये बता देते थे की कब उसने क्या खाया सिर्फ ये बताने के लिए की वो सब जानते हैं |
102. "मेरे नाल डायरेक्ट कनेक्शन जोड़ो" - गुरुजी
सीधा मेरे साथ संपर्क रखो ।
103. मैं पहले उन्हें आशीर्वाद देता हूँ जो तुम्हे मेरे पास लाता है, और उसके बाद की यात्रा तुम्हारी अपनी है |
104. अगर किसी अच्छी चीज़ या काम के साथ कुछ बुरा जुड़ा होता है तो उसे भी अच्छे की तरह ही स्वीकार करो क्योंकि संपूर्ण दोषरहित कुछ नही होता, जैसे गुलाब के साथ कांटे भी होते हैं |
105. गुरु अपना आशीर्वाद देने के बाद कभी वापिस नही लेते | गुरु के काम करने के तरीके आश्चर्यजनक होते हैं | हमें उनके आशीर्वाद को भौतिक वस्तुओं और नफे नुक्सान से नही मापना चाहिए ।

เค—ुเคฐुเคœी เค•ी เคธीเค– 1


เคฐाเคงे เคฐाเคงे ॥ เค†เคœ เค•ा เคญเค—เคตเคฆ เคšिเคจ्เคคเคจ ॥
     
เคธเคฌ เคตเคธ्เคคुเค“ं เค•ी เคคुเคฒเคจा เค•เคฐ เคฒेเคจा เคฎเค—เคฐ เค…เคชเคจे เคญाเค—्เคฏ เค•ी เค•เคญी เคญी เค•िเคธी เคธे เคคुเคฒเคจा เคฎเคค เค•เคฐเคจा। เค…เคงिเค•ांเคถเคคเคฏा เคฒोเค—ों เคฆ्เคตाเคฐा เค…เคชเคจे เคญाเค—्เคฏ เค•ी เคคुเคฒเคจा เคฆूเคธเคฐों เคธे เค•เคฐ เคต्เคฏเคฐ्เคฅ เค•ा เคคเคจाเคต เคฎोเคฒ เคฒिเคฏा เคœाเคคा เคนै เคต เค‰เคธ เคชเคฐเคฎाเคค्เคฎा เค•ो เคนी เคธुเคाเคต เคฆिเคฏा เคœाเคคा เคนै เค•ि เค‰เคธे เคเคธा เคจเคนीं, เคเคธा เค•เคฐเคจा เคšाเคนिเค เคฅा।
 
เคชเคฐเคฎाเคค्เคฎा เคธे เคถिเค•ाเคฏเคค เคฎเคค เค•िเคฏा เค•เคฐो। เคนเคฎ เค…เคญी เค‡เคคเคจे เคธเคฎเคเคฆाเคฐ เคจเคนीं เคนुเค เค•ि เค‰เคธเค•े เค‡เคฐाเคฆे เคธเคฎเค เคธเค•ें। เค…เค—เคฐ เค‰เคธ เคˆเคถ्เคตเคฐ เคจे เค†เคชเค•ी เคोเคฒी เค–ाเคฒी เค•ी เคนै เคคो เคšिंเคคा เคฎเคค เค•เคฐเคจा เค•्เคฏोंเค•ि เคถाเคฏเคฆ เคตเคน เคชเคนเคฒे เคธे เค•ुเค› เคฌेเคนเคคเคฐ เค‰เคธเคฎे เคกाเคฒเคจा เคšाเคนเคคा เคนो।
 
เค…เค—เคฐ เค†เคชเค•े เคชाเคธ เคธเคฎเคฏ เคนो เคคो เค‰เคธे เคฆूเคธเคฐों เค•े เคญाเค—्เคฏ เค•ो เคธเคฐाเคนเคจे เคฎें เคจ เคฒเค—ाเค•เคฐ เคธ्เคตเคฏं เค•े เคญाเค—्เคฏ เค•ो เคธुเคงाเคฐเคจे เคฎें เคฒเค—ाเค“। เคชเคฐเคฎाเคค्เคฎा เคญाเค—्เคฏ เค•ा เคšिเคค्เคฐ เค…เคตเคถ्เคฏ เคฌเคจाเคคा เคนै เคฎเค—เคฐ เค‰เคธเคฎें เค•เคฐ्เคฎ เคฐुเคชी เคฐंเค— เคคो เค–ुเคฆ เคนी เคญเคฐा เคœाเคคा เคนै।

!!!...เค–़ुเคฆ เคฎเคเคงाเคฐ เคฎें เคนोเค•เคฐ เคญी
เคœो เค”เคฐों เค•ा เคธाเคนिเคฒ เคนोเคคा เคนै
เคˆเคถ्เคตเคฐ เคœिเคฎ्เคฎेเคฆाเคฐी เค‰เคธी เค•ो เคฆेเคคा เคนैं
เคœो เคจिเคญाเคจे เค•े เค•़ाเคฌिเคฒ เคนोเคคा เคนै....!!!
         


เคชเคฐเคฎाเคค्เคฎा เคนเคฐ เคชเคฒ เคนเคฎाเคฐे เคนृเคฆเคฏ เคฎें เคนै เคนเคฎाเคฐे เคธเคฌ เคธे เคจเคœเคฆीเค• เคนै เค”เคฐ เคนเคฐ เคชเคฒ เคนเคฎाเคฐा เคญเคฒा เคšाเคนเคคे เคนै। เค‰เคจ เค•ी เค•ृเคชा เคชเคฐ เคญเคฐोเคธा เค•เคฐ เค•เคฐ เคธเคฐ्เคตเคคोเคญाเคต เคธे เค‰เคจ्เคนी เคชเคฐ เค›ोเฅœ เคฆेเคจा เคšाเคนिเค।

เคธंเคธाเคฐ เคธ्เคตเคช्เคจเคตเคค เคนै เคฎृเค—เคคृเคท्เคฃा เค•े เคœเคฒ เค•े เคธเคฎाเคจ เคธเคฎเคเคจा เคนी เคตैเคฐाเค—्เคฏ เคนै । เคตैเคฐाเค—्เคฏ เค•े เคฌिเคจा เคธंเคธाเคฐ เคธे เคฎเคจ เคจเคนी เคนเคŸเคคा เค‡เคธ เคฒिเค เคชเคฐเคฎाเคค्เคฎा เค•ी เคคเคฐเคซ เคœाเคจा เค•เค िเคจ เคนोเคคा เคนै। เค…เคคเคเคต เคธंเคธाเคฐ เค•ी เคธ्เคฅिเคคि เคชเคฐ เคตिเคšाเคฐ เค•เคฐ เค•े เค…เคชเคจे เค…เคธเคฒी เคธ्เคตเคฐुเคช เค•ो เคธเคฎเคเคจा เค”เคฐ เคตैเคฐाเค—्เคฏ เค•ो เคฌเฅाเคจा เคšाเคนिเค।

เคญเค—เคตเคจ เคเค•เคฎाเคค्เคฐ เคฎोเค•्เคท เค•े เคฆाเคคा เคนै เค‰เคจ เค•ा เคšिंเคคเคจ เค•เคฐเคจे เคธे เคธเคญी เคฌเคจ्เคงเคจ เค•เคŸ เคœाเคคे เคนै เคคुเคฎ เค•िเคคเคจे เคญी เคชाเคชी เคฆुเคฐाเคšाเคฐी เคนो เคญเค—เคตเคจ เคซिเคฐ เคญी เคคुเคฎ्เคนे เค…เคชเคจे เคธाเคฅ เคฎिเคฒाเคจा เคšाเคนเคคे เค…เคคः เคเค• เคฌाเคฐ เคธเคš्เคšी เคจिเคฐ्เคญเคฏเคคा เค•े เคธाเคฅ เคจिเคถ्เคšเคฏ เค•เคฐ เค•े เค‰เคจเค•ी เคถเคฐเคฃ เค—्เคฐเคนเคฃ เค•เคฐो เคคुเคฎ्เคนाเคฐे เคธเคฌ เคฌंเคงเคจ เค•्เคทเคฃों เคฎें เค•เคŸ เคœाเคฏेเค—े เค”เคฐ เคคुเคฎ เค‰เคจเค•े เคฆुเคฐ्เคฒเคญ เคฎोเค•्เคท เคธ्เคตเคฐूเคช เค•ो เคชा เคฒोเค—े।

เคœीเคตเคจ เค•ी เค•ोเคˆ เคเคธी เคชเคฐिเคธ्เคฅिเคคि เคจเคนीं เคœिเคธे เค…เคตเคธเคฐ เคฎें เคจा เคฌเคฆเคฒा เคœा เคธเค•े। เคนเคฐ เคชเคฐिเคธ्เคฅिเคคि เค•ा เค•ुเค› เคจा เคธเคจ्เคฆेเคถ เคนोเคคा เคนै। เค…เค—เคฐ เคนเคฎाเคฐे  เคชाเคธ เค•िเคธी เคฆिเคจ เค•ुเค› เค–ाเคจे เค•ो เคจा เคนो เคคो เคญी เคถ्เคฐी เคธुเคฆाเคฎा เคœी เค•ी เคคเคฐเคน เคช्เคฐเคญु เค•ो เคงเคจ्เคฏเคตाเคฆ เคฆें เค•ि  " เคนे เคช्เคฐเคญु ! เค†เคœ เค†เคชเค•ी เค•ृเคชा เคธे เคฏเคน เคเค•ाเคฆเคถी เคœैเคธा เคชुเคฃ्เคฏ เคฎुเคे เคช्เคฐाเคช्เคค เคนो เคฐเคนा เคนै।"

เค…เค—เคฐ เค•เคญी เคญाเคฐी เคธंเค•เคŸ เคญी เค† เคœाเค เคคो เคฎाँ เค•ुंเคคी เค•ी เคคเคฐเคน เคญเค—เคตाเคจ เค•े เคช्เคฐเคคि เค•ृเคคเคœ्เคžเคคा เคต्เคฏเค•्เคค เค•เคฐें เค•ि "เคนे เคช्เคฐเคญु ! เคฏเคฆि  เคฎेเคฐे เคœीเคตเคจ เคฎें เคฏเคน เคฆुःเค– เคจा เค†เคคा เคคो เคฎै เค†เคชเค•ो เค•ैเคธे เคธ्เคฎเคฐเคฃ เค•เคฐเคคा ?"

เคœीเคตเคจ เค•ी เค•ोเคˆ เคเคธी เคชเคฐिเคธ्เคฅिเคคि เคจเคนीं เคœिเคธे เค…เคตเคธเคฐ เคฎें เคจा เคฌเคฆเคฒा เคœा เคธเค•े। เคนเคฐ เคชเคฐिเคธ्เคฅिเคคि เค•ा เค•ुเค› เคจा เคธเคจ्เคฆेเคถ เคนोเคคा เคนै। เค…เค—เคฐ เคนเคฎाเคฐे  เคชाเคธ เค•िเคธी เคฆिเคจ เค•ुเค› เค–ाเคจे เค•ो เคจा เคนो เคคो เคญी เคถ्เคฐी เคธुเคฆाเคฎा เคœी เค•ी เคคเคฐเคน เคช्เคฐเคญु เค•ो เคงเคจ्เคฏเคตाเคฆ เคฆें เค•ि  " เคนे เคช्เคฐเคญु ! เค†เคœ เค†เคชเค•ी เค•ृเคชा เคธे เคฏเคน เคเค•ाเคฆเคถी เคœैเคธा เคชुเคฃ्เคฏ เคฎुเคे เคช्เคฐाเคช्เคค เคนो เคฐเคนा เคนै।"

เค…เค—เคฐ เค•เคญी เคญाเคฐी เคธंเค•เคŸ เคญी เค† เคœाเค เคคो เคฎाँ เค•ुंเคคी เค•ी เคคเคฐเคน เคญเค—เคตाเคจ เค•े เคช्เคฐเคคि เค•ृเคคเคœ्เคžเคคा เคต्เคฏเค•्เคค เค•เคฐें เค•ि "เคนे เคช्เคฐเคญु ! เคฏเคฆि  เคฎेเคฐे เคœीเคตเคจ เคฎें เคฏเคน เคฆुःเค– เคจा เค†เคคा เคคो เคฎै เค†เคชเค•ो เค•ैเคธे เคธ्เคฎเคฐเคฃ เค•เคฐเคคा ?"


เคฌांเค•े เคฌिเคนाเคฐी เค•ी เคฎเคนिเคฎा

*๐Ÿ’ฅเคตृเคจ्เคฆाเคตเคจ เค•े เคฌांเค•ेเคฌिเคนाเคฐी๐Ÿ’ฅ*

*เคฌीเค•ू เคจाเคฎ เค•ा เคฒเคก़เค•ा เคฐेเคฒเค—ाเคก़ी เคฎें เคธाเคซ เคธเคซाเคˆ เค•เคฐเค•े เค‰เคธเคธे เคœो เคชैเคธे เคฎिเคฒเคคे เค‰เคธเคธे เค…เคชเคจे เค˜เคฐ เค•ा เค—ुเคœाเคฐा เค•เคฐเคคा เคฅा!*
 *เค‰เคธเค•े เค˜เคฐ เคฎें เคเค• เคฌूเคข़ी เคฎां เคเค• เค›ोเคŸी เคฌเคนเคจ เค”เคฐ เคฌीเคฎाเคฐ เคชिเคคा เคฅे!*
 *1 เคฆिเคจ เคฐेเคฒ เค—ाเคก़ी เค•ी เคธीเคŸ เค•े เคจीเคšे เคธे เคธเคซाเคˆ เค•เคฐเคคे เค•เคฐเคคे เค‰เคธเค•ो เคเค• เคชเคฐ्เคธ เคฎिเคฒा เคชเคฐ्เคธ เค•ो เคชเค•เคก़เคคे เคนी เค‰เคธเค•े เคนाเคฅ เค•ांเคชเคจे เคฒเค—े เค‰เคธเค•ो เคฒเค—ा เค•ि เค‡เคธเคฎें เคฌเคนुเคค เคธाเคฐे เคชैเคธे เคนोंเค—े เค‰เคธเคจे เคœเคฒ्เคฆी เคธे เคชเคฐเคธ เค‰เค ाเคฏा เค”เคฐ เค…เคชเคจी เคจिเค•เคฐ เค•ी เคœेเคฌ เคฎें เคกाเคฒ เคฒिเคฏा เคตเคน เค‡เคธ เค‡ंเคคเคœाเคฐ เคฎें เคฅा เค•ि เค•เคฌ เค—ाเคก़ी เคฐुเค•े เค”เคฐ เค•เคฌ เคฎैं เค‡เคธ เคชเคฐ्เคธ เค•ो เค–ोเคฒ เค•เคฐ เคฆेเค–ूं เค•ि เค‡เคธ เคฎें เค•िเคคเคจे เคชैเคธे เคนैं เค”เคฐ เค‰เคจ เคชैเคธों เคธे เคฎें เค…เคชเคจे เค˜เคฐ เค•े เคฒिเค เค•ुเค› เคฐाเคถเคจ เคฌीเคฎाเคฐ เคชिเคคा เค•े เคฒिเค เคฆเคตाเคˆ เคฒेเค•เคฐ เคœाเคŠं।*

 *เคธ्เคŸेเคถเคจ เคชเคฐ เค—ाเคก़ी เคฐुเค•เคคे เคนी เคตเคน เคœเคฒ्เคฆी เคธे เค—ाเคก़ी เคธे เค‰เคคเคฐा เค”เคฐ เค•เคนीं เคเค•ांเคค เคฎें เคœाเค•เคฐ เคœเคฒ्เคฆी-เคœเคฒ्เคฆी เค‰เคธ เคชเคฐ เค‰เคธ เค•ो เค–ोเคฒ เค•เคฐ เคฆेเค–เคจे เคฒเค—ा เคชเคฐ्เคธ เค•ो เคฆेเค–เคคे เคนी เค‰เคธเค•े เคนोเคถ เค‰เคก़ เค—เค เค•्เคฏोंเค•ि เคชเคฐ्เคธ เคฌिเคฒ्เค•ुเคฒ เค–ाเคฒी เคฅा เค‰เคธเค•ी เคธाเคฐी เค‰เคฎ्เคฎीเคฆों เคชเคฐ เคชाเคจी เคซिเคฐ เค—เคฏा!*

 *เคชเคฐ्เคธ เค•ी เคชिเค›เคฒी เคœेเคฌ เคฎें เค…เคšाเคจเค• เค‰เคธเค•ो เค•िเคธी เคญเค—เคตाเคจ เค•ी เคคเคธ्เคตीเคฐ เคจเคœเคฐ เค†เคˆ เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคฆेเค–เคคे เคนी เคœैเคธे เค‰เคธเค•े เคถเคฐीเคฐ เคฎें เคนเคฒเคšเคฒ เคธी เคนोเคจे เคฒเค—ी เค”เคฐ เค‰เคธเค•ी เค†ंเค–ों เคธे เคฆो เคฎोเคŸे เคฎोเคŸे เค†ंเคธू เคจिเค•เคฒ เค•เคฐ เค‰เคธ เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•े เคšเคฐเคฃों เคฎें เค—िเคฐ เคชเคก़े!*

 *เคฏเคน เค†ंเคธु เคชเคฐ्เคธ เคฎें เค•ुเค› เคจा เคฎिเคฒเคจे เค•े เค•ाเคฐเคฃ เคฅे เคฏा เค‰เคธ เคคเคธ्เคตीเคฐ เคฎें เคฎिเคฒे เคญเค—เคตाเคจ เค•ो เคฆेเค–เค•เคฐ เคฅे! เคฌเคนुเคค เคนिเคฎ्เคฎเคค เค•เคฐ เค•े เคตो เคตเคนां เคธे เค‰เค ा เค”เคฐ เคฅเค•े เคนुเค เค•เคฆเคฎों เคธे เคšเคฒเคจे เค•ो เคคैเคฏाเคฐ เคนुเค† เคšเคฒเคคे เคšเคฒเคคे เคตเคน เคธोเคšเคจे เคฒเค—ा เค•ि เค†เคœ เคคो เค˜เคฐ เคฎें เค–ाเคจे เค•ो เค•ुเค› เคจเคนीं เคนै เคฎां เคญी เคญूเค–ी เคนै เคฌเคนเคจ เค•ी เคชेเคŸ เคฎें เคญी เค…เคจ्เคจ เค•ा เคเค• เคฆाเคจा เคจเคนीं เค—เคฏा เคฌीเคฎाเคฐ เคชिเคคा เค•ो เคญी เคฆเคตाเคˆ เค–ाเคจे เคธे เคชเคนเคฒे เค•ुเค› เค–ाเคจा เคฅा เคฏเคนी เคธोเคšเคคे เคธोเคšเคคे เค—เคฒी เค•ी เคจुเค•्เค•เคก़ เคชเคฐ เค•िเคธी เค•ी เคถाเคฆी เคนो เคฐเคนी เคฅी, เคถाเคฆी เคฎें เคฌเคšा เคนुเค† เค–ाเคจा เคตเคนां เค•ा เคธेเค  เคฒोเค—ों เค•ो เคฌांเคŸ เคฐเคนा เคฅा เคคो เคญी เค•ो เคญी เคฒाเค‡เคจ เคฎें เคฒเค— เค—เคฏा เคคो เค‰เคธเค•ो เคญी 2-3เคฒिเคซाเคซे เคญเคฐ เค•เคฐ เค–ाเคจे เค•े เคฒिเค เคฎिเคฒे!*

 *เค‰เคธเค•ी เคคो เค–ुเคถी เค•ा เคœैเคธे เค िเค•ाเคจा เคนी เคจเคนीं เคฅा เค˜เคฐ เคœाเคคे เคนी เค‰เคธเคจे เคฏเคน เค–ाเคจा เค…เคชเคจी เคฎां เค•ो เคฆिเคฏा เค”เคฐ เค•เคนा เค•ि เคฎां เคฆेเค–ो เค†เคœ เคฎैं เค•िเคคเคจा เค–ाเคจा เคฒाเคฏा เคนूं เคฎां เค•เคนเคคी เคนै เคฌेเคŸा เคฒा เคคेเคฐी เคฌเคนเคจ เคญुเค– เค•े เค•ाเคฐเคฃ เคธुเคฌเคน เคธे เคฐो เคฐเคนी เคนै เค”เคฐ เคฎैंเคจे เคญी เคธुเคฌเคน เคธे เค•ुเค› เคจเคนीं เค–ाเคฏा เค”เคฐ เคคेเคฐे เคฌीเคฎाเคฐ เคชिเคคा เค•ो เคญी เค•ुเค› เคšाเคนिเค เค–ाเคจे เค•े เคฒिเค !*

 *เคญीเค•ू เคนैเคฐाเคจ เคฅा เค•ि เคœो เคธेเค  เค‰เคธเค•ो เคฆेเค– เค•เคฐ เคจाเค• เคฎुंเคน เคธिเค•ोเคก़เคคा เคนै เค†เคœ เค‰เคธเคจे เคฎुเคे เค–ाเคจे เค•ो เค•्เคฏों เคฆे เคฆिเคฏा เคคเคญी เค‰เคธเคจे เคœेเคฌ เคฎें เคธे เคชเคฐ्เคธ เคจिเค•ाเคฒ เค•เคฐ เค”เคฐ เค‡เคธ เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคฆेเค–ा เค”เคฐ เค‰เคธเค•ा เคงเคจ्เคฏเคตाเคฆ เค•िเคฏा เค•ि เคถाเคฏเคฆ เค†เคœ เค†เคชเค•े เค•ाเคฐเคฃ เคนी เคฎुเคे เค–ाเคจा เคฎिเคฒा เคนै ।*
*เคฎां เคจे เค•เคนा เค•ि เคฏเคน เค–ाเคจा เคคो เค•เคฒ เคชूเคฐा เคฆिเคจ เคšเคฒ เคœाเคเค—ा เค…เค—เคฒे เคฆिเคจ เคญी เค•ो เคซिเคฐ เค•ाเคฎ เค•े เคฒिเค เคจिเค•เคฒा เคธ्เคŸेเคถเคจ เคชเคฐ เคชเคนुंเคšเคคे เคนी เคตเคน เค—ाเคก़ी เคฎें เคšเคข़เคจे เคฒเค—ा เค…เคญी เคเค• เคญी เคฌीเคฎाเคฐ เค”เคฐ เคฌूเคข़ी เค”เคฐเคค เค‰เคธเค•ो เค•เคนเคจे เคฒเค—ी เค•ि เค‰เคธเค•े เคฒिเค เคŸिเค•เคŸ เคฒे เค†เค“ เคฎेเคฐे เคชैเคฐ เคฎें เคšोเคŸ เคฒเค—ी เคนै เคฌीเค•ू เคฌोเคฒा เคนां เคนां เคฎां เคœी เคฎैं เคฒा เคฆूंเค—ा!*
 *เค‰เคธเคจे เค‰เคธเค•ो 500 เค•ा เคจोเคŸ เคฆिเคฏा เค”เคฐ เคญी เคเคŸ เคธे เคŸिเค•เคŸ เคฒेเคจे เค•े เคฒिเค เคšเคฒा เค—เคฏा เคคเคญी เค—ाเคก़ी เค•ी เคธीเคŸी เคฌเคœ เค—เคˆ เค”เคฐ เค—ाเคก़ी เคšเคฒเคจे เค•े เคฒिเค เคคैเคฏाเคฐ เคฅी เคคो เคฌीเค•ू เคญाเค—ा เคญाเค—ा!*

 *เคฐेเคฒ เค—ाเคก़ी เค•ी เค–िเคก़เค•ी เคธे เคธे เคนी เค‰เคธ เคฌूเคข़ी เค”เคฐเคค เค•ो เคŸिเค•เคŸ เคชเค•เคก़ा เค†เคคा เคนै เคฒेเค•िเคจ เคฌाเค•ी เคชैเคธे เค‰เคธเค•े เคนाเคฅ เคฎें เคนी เคฐเคน เคœाเคคे เคนैं เคคो เคฌूเคข़ी เค”เคฐเคค เค‰เคธเค•ो เค–िเคก़เค•ी เคธे เค‡เคถाเคฐा เค•เคฐเคคी เคนै เคฌाเค•ी เคคू เคฐเค– เคฒे เคฌाเค•ी ₹275 เคฌเคšे เคฅे เคฌीเค•ू เคนैเคฐाเคจी เคธे เคนाเคฅ เคฎें เคชเค•เคก़ เค•े เคชैเคธों เค•ो เคฆेเค–เคคा เคฐเคนा! เคคเคฌ เคคเค• เค—ाเคก़ी เคœा เคšुเค•ी เคฅी เคตเคน เค—ाเคก़ी เคฎें เคจा เคšเคข़เค•เคฐ เค˜เคฐ เค•ी เคคเคฐเคซ เคšเคฒ เคชเคก़ा เค”เคฐ เคฐाเคธ्เคคे เคฎें เค‰เคธเคจे เคเค• เคนเคซ्เคคे เค•ा เค‰เคจ เคชैเคธों เคธे เคฐाเคถเคจ เคฒे เคฒिเคฏा เค”เคฐ เคฎां เค•ो เคฆेเค–เค•เคฐ เคฌोเคฒा เคฆेเค–ो เคฎां เค†เคœ เคคो เค–ूเคฌ เค•เคฎाเคˆ เคนुเคˆ เคฏเคน เคเค• เคนเคซ्เคคे เค•ा เคชूเคฐा เคฐाเคถเคจ เคนै เคฎां เคฏเคน เคฆेเค–เค•เคฐ เคฌเคนुเคค เค–ुเคถ เคนुเคˆ เคคเคญी เค‰เคธเคจे เคœेเคฌ เคฎें เคธे เคซिเคฐ เคตเคนी เคญเค—เคตाเคจ เค•ो เคจिเค•ाเคฒ เค•เคฐ เคฆेเค–ा เค”เคฐ เค•เคนा เค•ि เคฏเคน เคธเคฌ เคšเคฎเคค्เค•ाเคฐ เค†เคชเค•े เค•ाเคฐเคฃ เคนी เคนो เคฐเคนा เคนै !*

*เคฎैं เคจเคนीं เคœाเคจเคคा เค•ि เค†เคช เค•ौเคจ เคนो เคคเคญी เค‰เคธเคจे เคœे เคฎें เคธे เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคจिเค•ाเคฒ เค•เคฐ เค…เคชเคจी เคฎां เค•ो เคฆिเค–ाเคฏा เค”เคฐ เค•เคนा เค•ी เคฎां เคฏเคน เค•ौเคจ เคธे เคญเค—เคตाเคจ เคนै?*

 *เคฎां เคจे เค‰เคธเค•ी เคคเคฐเคซ เคจเคนीं เคฆेเค–ा เค•्เคฏोंเค•ि เคตเคน เคคो เค‡เคคเคจा เคฐाเคถเคจ เคฆेเค–เค•เคฐ เคฌเคนुเคค เค–ुเคถ เคนो เคฐเคนी เคฅी เคฌीเค•ू เคจे เคฆेเค–ा เค•ि เคฎा เคจเคนीं เคฆेเค– เคฐเคนी เคคो เค‰เคธเคจे เคชเคฐ्เคธ เค…เคชเคจी เคœेเคฌ เคฎें เคนी เคฐเค– เคฒिเคฏा เคซिเคฐ เคเค• เคฆिเคจ เคœเคฌ เคตो เคฐेเคฒ เค—ाเคก़ी เคฎें เคธเคตाเคฐ เคนोเค•เคฐ เคœा เคฐเคนा เคฅा เค”เคฐ เคธเคซाเคˆ เค•ी เคธीเคŸों เค•े เคจीเคšे เคธเคซाเคˆ เค•เคฐ เคฐเคนा เคฅा เคคเคญी เค†เค  10 เคฒोเค— เคตเคนी เคคเคธ्เคตीเคฐ เคตเคนी เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคฒेเค•เคฐ เคœोเคฐ เคœोเคฐ เคธे เคนเคฐे เค•ृเคท्เคฃा เค•ा เคœाเคช เค•เคฐें เคนैं!*

 *เคฌीเค•ू เค‰เคธ เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคฆेเค–เค•เคฐ เคนैเคฐाเคจ เคนो เค—เคฏा เค”เคฐ เคธीเคŸ เคชเคฐ เคฌैเค ी เคเค• เคฌूเคข़ी เค”เคฐเคค เค•ो เคนाเคฅ เคœोเคก़เค•เคฐ เคฌเคก़ी เคตिเคจเคฎ्เคฐเคคा เคธे เคฌोเคฒा เค•ि เคฎाเคคाเคœी เคฏเคน เค•ौเคจ เคนै เค”เคฐ เค†เคช เคฏเคน เค•्เคฏा เคญเคœเคจ เค•เคฐ เคฐเคนे เคนो?*
 *เคฎुเคे เคญी เคฌเคคाเค“ เคคो เค‰เคธเค•ी เคคो เคตเคน เค”เคฐเคค เค•เคนเคคी เค•ि เคฏเคน เคฌांเค•े เคฌिเคนाเคฐी เคœी เคนै! เคฏเคน เคตृंเคฆाเคตเคจ เคฎें เคฐเคนเคคे เคนैं, เคœो เคญी เค‡เคจ เค•ी เคถเคฐเคฃ เคฎें เคœाเคคा เคนै เคฌांเค•े เคฌिเคนाเคฐी เค‰เคธเค•ी เคธเคญी เคฎเคจोเค•ाเคฎเคจा เค•ो เคชूเคฐ्เคฃ เค•เคฐเคคे เคนैं!*

 *เคฏเคน เคตृंเคฆाเคตเคจ เค•े เคฎाเคฒिเค• เคนी เคธเคฎเค เคฒो เคฌीเค•ू เคœेเคฌ เคฎें เคธे เค‰เคธ เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคจिเค•ाเคฒเค•เคฐ เค‰เคธ เคฎाเคคाเคœी เค•ो เคฆिเค–ाเคคा เคนै เค•ि เคฏเคน เคฌांเค•े เคฌिเคนाเคฐी เคœी เคนैं เคคो เคตเคน เค•เคนเคคी เคนां เคนां เคฌेเคŸा เคฏเคน เคฌांเค•े เคฌिเคนाเคฐी เคœी เคนैं !เคฏเคน เคตृंเคฆाเคตเคจ เคฎें เคฐเคนเคคे เคนैं เคคो เคฌीเค•ू เค•ी เค†ंเค–ों เคฎें เคซ़िเคฐ เค†ंเคธू เค† เค—เค เคตเคน เค•เคนเคคा เค•ि เคฎैंเคจे เคญी เคตृंเคฆाเคตเคจ เคœाเคจा เคนै, เค•ी เค•्เคฏा เคฎुเคे เคฒेเค•เคฐ เคœाเค“เค—े,เคคो เคฎाเคคा เคœी เค•เคนเคคे เคนैं เคฏเคน เค—ाเคก़ी เคตृंเคฆाเคตเคจ เคนी เคœा เคฐเคนी เคนै เคšเคฒो เคคू เคฎेเคฐे เคธाเคฅ เคนी เคšเคฒो เคฌीเค•ू เค•ो เค†เคช เคชीเค›े เค…เคชเคจी เคฎां เค”เคฐ เคฌเคนเคจ เค•ी เค–ाเคจे เค•ी เค•ोเคˆ เคšिंเคคा เคจเคนीं เคฅी,เค•्เคฏोंเค•ि เคฌिเคนाเคฐी เคœी เคจे เคคเคฌ เคคเค• เคฒिเค เคคो เค‰เคจเค•ा เค‡ंเคคเคœाเคฎ เค•เคฐ เคนी เคฆिเคฏा เคฅा เคฌीเค•ू เคฎाเคคाเคœी เค”เคฐ 8-10 เคฒोเค—ों เค•े เคธाเคฅ เคšเคฒ เคชเคก़ा เคตृंเคฆाเคตเคจ เคชเคนुंเคšเคคे เคนी เคตเคน เคฒोเค— เค…เคชเคจे เคฐเคธ्เคคे เคšเคฒ เคชเคก़े เคฌीเค•ू เค•ो เค•ुเค› เคญी เคจเคนीं เคชเคคा เคฅा เค•ि เคตเคน เค•เคนां เคœाเค เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•เคนां เคฐเคนเคคे เคนैं เคคो เคตเคน เคฒोเค—ों เค•ो เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•ी เคคเคธ्เคตीเคฐ เค•ो เคฆिเค–ाเคคा เคนुเค† เค•เคนเคคा เคนै เค•ि เคฏเคน เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•เคนां เคฐเคนเคคे เคนैं,เคคो เคตृंเคฆाเคตเคจ เค•े เคฒोเค— เค‰เคธ เคชเคฐ เคนंเคธเคคे เคนुเค เค•เคนเคคे เคนैं เค•ि เคฏเคน เคตृंเคฆाเคตเคจ เค‰เคจเค•ा เคนी เคนै!*

 *เคฏเคน เคนเคฐ เคœเค—เคน เคฐเคนเคคे เคนैं เคซिเคฐ เคตเคน เค•เคนเคคा เค•ि เค‰เคจเค•ा เค˜เคฐ เค•เคนां เคนै เคคเคฌ เคเค• เคธเคœ्เคœเคจ เคชुเคฐुเคท เคฌीเค•ू เค•ो เคฎिเคฒा เค”เคฐ เค•เคนเคจे เคฒเค—ा เค•ि เคšเคฒो เคฎैं เคคुเคे เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•े เคชाเคธ เคฒेเค•เคฐ เคœाเคคा เคนूं เคคเคฌ เค‰เคธเค•ो เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•े เคฎंเคฆिเคฐ เคฒेเค•เคฐ เค† เคฎंเคฆिเคฐ เคฎें เคฌเคนुเคค เคญीเคก़ เคฅी เคฌीเค•ू เค•ो เค•ुเค› เคญी เคจเคœเคฐ เคจเคนीं เค† เคฐเคนा เคฅा เคตเคน เคฆूเคฐ เคธे เคนी เคœी เค•ो เคฆेเค–เค•เคฐ เคจिเคนाเคฒ เคนो เค—เคฏा।*

 *เค‰เคธเค•ी เค†ंเค–ों เคฎें เคเคฐ เคเคฐ เค†ंเคธू เคฌเคนเคจे เคฒเค—े เค†ंเคธू เค•े เค•ाเคฐเคฃ เค‰เคธเค•ी เค‰เคธเค•ी เค†ंเค–ों เคฎें เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•ी เค›เคตि เคงुंเคงเคฒी เคงुंเคงเคฒी เค†เคจे เคฒเค—ी เคคเคญी เคฎंเคฆिเคฐ เค•ी เคฒाเค‡เคŸ เคšเคฒी เค—เคˆ เค†ंเค–ों เคฎें เคงुंเคงเคฒाเคชเคจ เค•े เค•ाเคฐเคฃ เค”เคฐ เคฒाเค‡เคŸ เคฒाเค‡เคŸ เคจा เคนोเคจे เค•े เค•ाเคฐเคฃ เคญी เค•ो เค•ो เค•ुเค› เคญी เคจเคœเคฐ เคจเคนीं เค† เคฐเคนा เคฅा เคคเคญी เค‰เคธเค•ो เค…เคชเคจे เคชाเคธ เคเค• เคคेเคœ เคฐोเคถเคจी เคจเคœเคฐ เค†เคˆ เค”เคฐ เค‰เคธเค•ो เคฒเค—ा เค•ि เค‰เคธเค•ा เคนाเคฅ เค•ोเคˆ เค–ींเคš เคฐเคนा เคนै।*
 *เคœเคฌ เค‰เคธเคจे เคง्เคฏाเคจ เคธे เคฆेเค–ा เคเค• เค›ोเคŸा เคธा เคฌाเคฒเค• เค‰เคธเค•ो เค–ींเคš เค•เคฐ เค•เคน เคฐเคนा เคนै- เคฌीเค•ू เคคूเคฎ เค†เค“ เคฎेเคฐे เคธाเคฅ।*

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 *เคœเคฌ เค‰เคธเคจे เคŠเคชเคฐ เค‰เค เค•เคฐ เคฆेเค–ा เคคो เคฌिเคนाเคฐी เคœी เคตเคนां เคจเคนीं เคฅे เคตเคน เคคो เคฎंเคฆिเคฐ เคฎें เคตिเคฐाเคœเคฎाเคจ เคฅे! เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•ी เค…เคชเคจे เคŠเคชเคฐ เคเคธी เค•ृเคชा เคฆेเค–เค•เคฐ เคฌीเค•ू เคงเคจ्เคฏ เคงเคจ्เคฏ เคนो เค‰เค ा,เค”เคฐ เคฌिเคนाเคฐी เคœी เค•ो เคเค•เคŸเค• เคจिเคนाเคฐเคคा เคฐเคนा เค”เคฐ เคฎเคจ เคฎें เคฌोเคฒเคคा เคฐเคนा เคฌांเค•े เคฌिเคนाเคฐी เคฒाเคฒ เค•ी เคœเคฏ เคนो!!*

HAVE FAITH IN YOURSELF

एक बार यह कहानी जरूर पढिये । आपके जीवन में जरूर बदलाव लाएगी ।

गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था।
उड़ते – उड़ते  वे एक टापू पे पहुँच गए। वो जगह उनके लिए स्वर्ग के समान थी। हर तरफ खाने के लिए मेंढक, मछलियाँ और समुद्री जीव मौजूद थे और इससे भी बड़ी बात ये थी कि वहां इन गिद्धों का शिकार करने वाला कोई जंगली जानवर नहीं था और वे बिना किसी भय के वहाँ रह सकते थे।

युवा गिद्ध  कुछ ज्यादा ही उत्साहित थे, उनमे से एक ने बोला:-

” वाह ! मजा आ गया, अब तो मैं यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला, यहाँ तो बिना किसी मेहनत के ही हमें बैठे -बैठे खाने को मिल रहा है!”

बाकी गिद्ध भी उसकी हाँ में हाँ मिला ख़ुशी से झूमने लगे।

सबके दिन मौज -मस्ती में बीत रहे थे लेकिन झुण्ड का सबसे बूढ़ा गिद्ध इससे खुश नहीं था।

एक दिन अपनी चिंता जाहिर करते हुए वो बोला:-

” भाइयों, हम गिद्ध हैं, हमें हमारी ऊँची उड़ान और अचूक वार करने की ताकत के लिए जाना जाता है। पर जबसे हम यहाँ आये हैं हर कोई आराम तलब हो गया है …ऊँची उड़ान तो दूर ज्यादातर गिद्ध तो कई महीनो से उड़े तक नहीं हैं…और आसानी से मिलने वाले भोजन की वजह से अब हम सब शिकार करना भी भूल रहे हैं … ये हमारे भविष्य के लिए अच्छा नहीं है …मैंने फैसला किया है कि मैं इस टापू को छोड़ वापस उन पुराने जंगलो में लौट जाऊँगा …अगर मेरे साथ कोई चलना चाहे तो चल सकता है !”

बूढ़े गिद्ध की बात सुन बाकी गिद्ध हंसने लगे। किसी ने उसे पागल कहा तो कोई उसे मूर्ख की उपाधि देने लगा। बेचारा बूढ़ा गिद्ध अकेले ही वापस लौट गया।

समय बीता, कुछ वर्षों बाद बूढ़े गिद्ध ने सोचा, ” ना जाने मैं अब कितने दिन जीवित रहूँ, क्यों न एक बार चल कर अपने पुराने साथियों से मिल लिया जाए!”

लम्बी यात्रा के बाद जब वो टापू पे पहुंचा तो वहां का दृश्य भयावह था।

ज्यादातर गिद्ध मारे जा चुके थे और जो बचे थे वे बुरी तरह घायल थे।

“ये कैसे हो गया ?”, बूढ़े गिद्ध ने पूछा।

कराहते हुए एक घायल गिद्ध बोला, “हमे क्षमा कीजियेगा, हमने आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया और आपका मजाक तक उड़ाया … दरअसल, आपके जाने के कुछ महीनो बाद एक बड़ी सी जहाज इस टापू पे आई …और चीतों का एक दल यहाँ छोड़ गयी। चीतों ने पहले तो हम पर हमला नहीं किया, पर जैसे ही उन्हें पता चला कि हम सब न ऊँचा उड़ सकते हैं और न अपने पंजो से हमला कर सकते हैं…उन्होंने हमे खाना शुरू कर दिया। अब हमारी आबादी खत्म होने की कगार पर है .. बस हम जैसे कुछ घायल गिद्ध ही ज़िंदा बचे हैं !”

बूढ़ा गिद्ध उन्हें देखकर बस अफ़सोस कर सकता था, वो वापस जंगलों की तरफ उड़ चला।

दोस्तों, अगर हम अपनी किसी शक्ति का प्रयोग नहीं करते तो धीरे-धीरे हम उसे खो देते हैं।

उदाहरण के तौर पर अगर हम अपने brain का use नहीं करते तो उसकी sharpness घटती जाती है, अगर हम अपनी muscles का use नही करते तो
उनकी ताकत घट जाती है… इसी तरह अगर हम अपनी skills को polish नहीं करते तो हमारी काम करने की efficiency कम होती जाती है!

तेजी से बदलती इस दुनिया में हमें खुद को बदलाव के लिए तैयार रखना चाहिए। पर बहुत बार हम अपनी current job या business में इतने comfortable हो जाते हैं कि बदलाव के बारे में सोचते ही नहीं और अपने अन्दर कोई नयी skills add नहीं करते, अपनी knowledge बढ़ाने के लिए कोई किताब नहीं पढ़ते कोई training program नहीं attend करते, यहाँ तक की हम उन चीजों में भी dull हो जाते हैं जिनकी वजह से कभी हमे जाना जाता था और फिर जब market conditions change होती हैं और हमारी नौकरी या बिज़नेस पे आंच आती है तो हम हालात को दोष देने लगते हैं।

ऐसा मत करिए…अपनी काबिलियत, अपनी ताकत को जिंदा रखिये…अपने कौशल, अपने हुनर को और तराशिये…उसपे धूल मत जमने दीजिये…और जब आप ऐसा करेंगे तो बड़ी से बड़ी मुसीबत आने पर भी आप ऊँची उड़ान भर सके !!!