Peace and love bring prosperity

एक सुनार  से लक्ष्मी  जी  रूठ गई ।

जाते वक्त  बोली मैं जा रही  हूँ
और मेरी जगह  नुकसान आ रहा है ।

तैयार  हो जाओ।
लेकिन  मै तुम्हे अंतिम भेट जरूर देना चाहती हूँ।
मांगो जो भी इच्छा  हो।

सुनार बहुत समझदार  था।
उसने 🙏 विनती  की नुकसान आए तो आने  दो ।

लेकिन  उससे कहना की मेरे परिवार  में आपसी  प्रेम  बना रहे।
बस मेरी यही इच्छा  है।

लक्ष्मी  जी  ने  तथास्तु  कहा।

कुछ दिन के बाद :-

सुनार की सबसे छोटी  बहू  खिचड़ी बना रही थी।

उसने नमक आदि  डाला  और अन्य  काम  करने लगी।

तब दूसरे  लड़के की  बहू आई और उसने भी बिना चखे नमक डाला और चली गई।

इसी प्रकार  तीसरी, चौथी  बहुएं  आई और नमक डालकर  चली गई ।

उनकी सास ने भी ऐसा किया।

शाम  को सबसे पहले सुनार  आया।

पहला निवाला  मुह में लिया।
देखा बहुत ज्यादा  नमक  है।

लेकिन  वह समझ गया  नुकसान (हानि) आ चुका है।

चुपचाप खिचड़ी खाई और चला गया।

इसके बाद  बङे बेटे का नम्बर आया।

पहला निवाला  मुह में लिया।
पूछा पिता जी  ने खाना खा लिया क्या कहा उन्होंने ?

सभी ने उत्तर दिया-" हाँ खा लिया, कुछ नही बोले।"

अब लड़के ने सोचा जब पिता जी ही कुछ  नही  बोले तो मै भी चुपचाप खा लेता हूँ।

इस प्रकार घर के अन्य  सदस्य  एक -एक आए।

पहले वालो के बारे में पूछते और चुपचाप खाना खा कर चले गए।

रात  को नुकसान (हानि) हाथ जोड़कर

सुनार से कहने लगा  -,"मै जा रहा हूँ।"

सुनार ने पूछा- क्यों ?

तब नुकसान (हानि ) कहता है, " आप लोग एक किलो तो नमक खा गए  ।

लेकिन  बिलकुल  भी  झगड़ा  नही हुआ। मेरा यहाँ कोई काम नहीं।"

*निचोङ*

⭐झगड़ा कमजोरी, हानि, नुकसान  की पहचान है।

👏जहाँ प्रेम है, वहाँ लक्ष्मी  का वास है।

🔃सदा प्यार -प्रेम  बांटते रहे। छोटे -बङे  की कदर करे ।

जो बङे हैं, वो बङे ही रहेंगे ।

चाहे आपकी कमाई उसकी कमाई   से बङी हो।   🙏🙏🙏🙏

अच्छा लगे तो आप जरुर किसी अपने को भेजें।

☘☘☘ *- Զเधे   Զเधे -* ☘☘☘

             *अच्छे के साथ अच्छे बनें,*
             *पर  बुरे के  साथ बुरे नहीं।*

                     *....क्योंकि -*
                           🔰
             *हीरे से हीरा तो तराशा जा*
             *सकता है लेकिन कीचड़ से*
             *कीचड़  साफ  नहीं किया*
             *जा सकता ।*

☘☘☘ ☘☘☘

Vaishno Devi Darshan

Vaishno Devi is a very religious place in Jammu . The most  devotees of Vaishno Devi visit every year. Millions of millions people visit this place to worship  Vaishno Devi.

Good deeds pay in the long run

एक आदमी ❄बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था___

एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया
और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया..

छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे
किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है।

वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो
भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा।

अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया, अहिल्या को पत्थर से नारि बनाया, शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया।
प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो।
मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ।

मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।

एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई।

दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया।

उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और  🔥 गर्म हीटर के पास ले गया।

उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई तो उसने चौकीदार से पूछा,   आप अंदर कैसे आए ?

चौकीदार बोला कि साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर कारखाने में आते जाते हैं।

मैं देखता हूं लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हो तो मुझसे हंस कर
*राम राम* करते हो
और हालचाल पूछते हो और निकलते हुए आपका
*राम राम काका*
कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है।

जबकि अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं।

आज हर दिनों की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना लेकिन
*राम राम काका*
सुनने के लिए इंतज़ार
करता रहा।

जब ज्यादा देर हो गई तो मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो।

वह आदमी हैरान हो गया कि किसी को हंसकर
*राम राम* कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई।

*राम कहने से तर जाओगे*
मीठे बोल बोलो,
संवर जाओगे,

सब की अपनी जिंदगी है
यहाँ कोई किसी का नही खाता है।

जो दोगे औरों को,
वही वापस लौट कर आता है।   👏👏👏

Heart touching story

True heart  touching story
(दया मेहर की बात )
लंगर में जब खाना (गुरुप्रसाद )दिया जाता है तो बार-बार Annoucement की जाती है कि जितनी जरूरत हो उतना ही लिया जाए क्योंकि उस पर गुरु की दृष्टि पड़ी होती है और वैसे भी हमें अपने अन्न का निरादर नहीं करना चाहिए । एक बच्चा Handicap था ठीक से खाना भी नहीं खा सकता था, लंगर में बैठा था । खाना खाने की कोशिश कर रहा था, थोड़ी दूरी पर एक औरत यह सब देख रही थी । उसका मन दया से भर गया कि बच्चा बेचारा खाना नहीं खा सकता और बच्चे की जो लार मुंह से निकल निकल कर थाली में (सब्जी में) गिर रही थी, उस औरत ने उसके पास जाकर उस बच्चे को छोटे-छोटे टुकड़े रोटी के तोड़ कर मुंह में डाले, बेटा खा ले तुझ से खाया नहीं जाता ,कुछ खाना खाया कुछ थाली में रह गया जब वो टूटियों की तरफ जाने लगी तो सेवादारों ने पकड़ लिया ,अब वह बेचारी बर्तन धोने जा रही थी सेवादारों ने कहा कि इसे खा, खाने के बाद बर्तन धोना है खाली करके ।  औरत रोने लगी उसने बात समझाई यह बच्चा मेरा नहीं है, ये खाना नहीं सकता, खाने में इसकी मदद कर रही थी। ये बच्चा मेरा नहीं है । सेवादारों ने उसकी एक न सुनी और उसे कहा हम नहीं जानते तू झूठ बोल रही है तू खाना खा । एक घंटा रोती रही। अब अपना झूठा तो खाया नहीं जाता दूसरे का मुंह से निकाला हुआ खाना कौन खाए ? खैर जब 2 घंटे रोती रही सेवादारों ने उसे नहीं छोड़ा आखिर मन समझा-बुझाकर किसी तरह से उसने उस खाने को खत्म किया ,बाद में वह औरत बहुत रोई और ड़ेरा समिति के पास पहुंच गई बोली कि मुझे गुरूजी से बात करनी है। जब  सामने पेश हुई उसने जाते ही कहा गुरूजी जी मेरा क्या कसूर था  ? आप के सेवादारों ने मेरे साथ धक्का किया, मुझे जबरदस्ती दूसरे का झूठा खाना खिलाया तो गुरूजी ने कहा बीवी वो 4 सेवादार तुम्हें खाना खिला रहे थे उसमें 5वां मैं भी था ,वह सुनकर हैरान हो गई । गुरूजी ने कहा क्योंकि तुझे गुरु ने नाम दान दिया है तेरे करम बहुत भारी थे और तुझे अगला जन्म  सूअर का मिलने वाला था और सारी जिंदगी तूने गंदगी में मुंह चलाना था ।लेकिन परमात्मा की तुझ पर दया थी इसलिए तुझे एक बच्चे का झूठा खाना खिलाकर तेरे कर्मों का भुगतान कर दिया। तो वह किस रूप में दया करते हैं यह हमको कुछ पता नहीं होता , जिस चीज को हम बुरा मानते हैं शायद उसमें हमारा भला होता है । गुरूजी हमसे ज्यादा बेहतर जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा । इसलिए हमें कभी भी गुरुजी द्वारा की गई दात को छोटा नहीं समझना चाहिए । पता नहीं उसमें कौन सा राज छुपा होता है  ?

🙏🌷*जय जय गुरुजी*🌷🙏
🙏🌷*ऊँ नमः शिवायः शिवजी सदा सहाय*🌷🙏
🙏🌷*ऊँ नमः शिवायः गुरुजी सदा सहाय*🌷🙏
🙏🌷*जय जय                                  गुरुजी*                                               
🙏🌷*शुक्रराना गुरुजी*🌷🙏

The power of Belief

Motivational Story On “The Power Of Belief

किसी शहर में एक कमल नाम का नवयुवक रहता था। अपने बचपन में वह बहुत होशियार था। बहुत से लोग उसकी तारीफ करते थे।

लेकिन उसके साथ समस्या यह थी कि उसे भीड़ से बहुत डर लगता था।

जब वह बड़ा हुआ तो उसका डर इतना बढ़ गया कि वह घर से बाहर निकलने से भी डरता था।

वह कहीं बाहर बहुत कम ही जाता था लेकिन उसे पढ़ने लिए अपने कॉलेज तो जाना ही होता था। कॉलेज जाते और आते समय भीड़ देखकर उसका मन परेशान हो जाता था।

इस कारण न तो उसका पढ़ाई में मन लगता था और न ही किसी और काम में मन लगता था।

वह सोचता था कि अपनी इस डर की समस्या के कारण वह अपनी जिंदगी में कभी सफल नहीं हो पाएगा। इस कारण उसका गुस्सा भी बढ़ गया था।

एक दिन उसके शहर में एक बहुत बड़े और प्रसिद्ध संत आए। वह संत सभी लोगों की समस्याओं का समाधान करते थे जिससे बहुत से लोगों को लाभ हुआ था।

कमल ने सोचा कि शायद वह मेरी समस्या का भी कोई समाधान कर दें।

दूसरे ही दिन कमल संत से मिलने पहुंच गया और उसने अपनी पूरी समस्या उस संत को बता दी।

संत ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारी समस्या का हल मेरे पास है लेकिन यदि तुम्हे मुझ पर विश्वास हो तो मैं वह समाधान तुम्हें बता सकता हूँ।”
कमल ने कहा, “आप पर विश्वास करके ही मैं यहाँ आया हूँ, कृपया समाधान बताएं।”

तभी संत ने एक बहुत छोटा सफेद पत्थर कमल को देते हुए कहा, “यह एक जादुई पत्थर है। इसकी खासियत यह है कि यह जिसके पास होता है उसे कभी भी डर नहीं लगता और यह हर समस्या में सहायता भी करता है।” 
कमल बहुत खुश हुआ और अपने घर लौट आया।

अगले दिन जब वह कॉलेज के लिए जाने लगा तो उसने उस सफेद पत्थर को अपने पास रख लिया।

घर से बाहर निकलते ही उसका सामना भीड़ से हुआ।

पहले तो उसे कुछ डर लगा लेकिन उस सफेद पत्थर का ध्यान आते ही उसका डर भाग गया।

उस दिन कमल को भीड़ से बिलकुल भी डर नहीं लगा।

वह बहुत खुश था। अब उसे लगने लगा था कि पत्थर का जादू काम कर रहा है।

भीड़ से अब डर न लगने के कारण वह अब आराम से कहीं भी बाहर जा सकता था। उसे अब गुस्सा भी नहीं आता था।

अब वह सफल होने के बारे में सोचने लगा था। अब उसे यह विश्वास हो गया था कि वह जीवन में कोई भी सफलता प्राप्त कर सकता है।

कमल का जीवन बदल चुका था।

कुछ ही समय बाद वह सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ता चला गया और एक सफल इंसान के रूप में गिना जाने लगा।

अब कमल को उन संत की याद आयी तो उनसे मिलने पहुंच गया।

कमल ने संत को अपनी सफलता के बारे में बताया और उस सफेद पत्थर की जादुई शक्ति की तारीफ करने लगा।

तभी वह संत बोले, “वह सफेद पत्थर जो मैंने तुम्हें दिया था वह तो मुझे रास्ते में कहीं पड़ा मिला था। मुझे वह पत्थर अच्छा लगा तो मैंने उसे उठा कर अपने पास रख लिया।”

कुछ समय रुकने के बाद संत फिर बोले, “सच यह है कि यह कोई जादुई पत्थर नहीं है बल्कि एक साधारण पत्थर है।”
यह सुनकर कमल को बहुत आश्चर्य हुआ।

कमल बोला, “जब यह एक साधारण पत्थर है तो इसने मेरा डर कैसे दूर कर दिया?  और आज मैं जिस सफलता के शिखर पर हूँ तो वहां मैं कैसे पहुंचा?”

तब वह महान संत मुस्कुराते हुए बोले, “सच है कि इस पत्थर ने तुम्हें कोई लाभ नहीं पहुँचाया बल्कि तुम्हारी विश्वास की शक्ति ने तुम्हारे डर को भगाया और विश्वास की शक्ति ने ही तुम्हे सफल बनाया है।

तुम अपने डर पर विजय प्राप्त इसीलिए नहीं कर पा रहे थे क्योकि तुम्हें खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब मैंने तुम्हें यह सफेद पत्थर दिया तो इसकी वजह से तुम्हारे अंदर विश्वास पैदा हो गया।

तुम्हारे विश्वास के कारण ही डर भाग गया और डर के जाते ही तुम्हारा आत्मविश्वास और ज्यादा बढ़ गया।

जैसे-जैसे तुम सफल होते गए वैसे-वैसे तुम्हारा खुद के लिए विश्वास बढ़ता गया और इसी विश्वास की वजह से आज तुम एक सफल व्यक्ति बन पाए हो।”

इतना सुनते ही कमल उस महान संत के चरणों में गिर गया और उन्हें धन्यवाद देने लगा।
दोस्तों! इस कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है कि जिस व्यक्ति को स्वयं में विश्वास (Believe in yourself) होता है उसके सामने बड़ी से बड़ी समस्या ज्यादा देर नहीं टिक पाती।

 
ऐसे व्यक्ति के सामने आने वाली प्रत्येक समस्या उसके कदमों में आकर दम तोड़ देती है।

 कमल का डर (Fear) एक समस्या थी। वह उससे जितनी दूर भाग रहा था, उतना ही ज्यादा डर उसके पास आ रहा था और जब कमल ने अपनी विश्वास की शक्ति (Power of believing) से उस डर का सामना किया तो डर भाग खड़ा हुआ।

 
अगर आप सफल (Success) होना चाहते हैं तो आपको खुद पर विश्वास (Self confidence) करना होगा।

 
आपको अपने कार्यों पर विश्वास (Believe in your work) करना होगा।

 आपको अपने सफलता के लिए किये गए प्रयासों पर विश्वास (Believe in your efforts) करना होगा।

 और जब आपमें खुद के प्रति यह विश्वास आ जायेगा तो आप सफलता की ओर कदम बढ़ाते चले जायेंगे और एक दिन सफलता के शिखर (Top of success) पर पहुंच कर दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत (Source of inspiration) बन जायेंगे।

 

जो लोग स्वयं पर विश्वास (Trust in yourself) रखते हैं उन्हें किसी पत्थर की आवश्यकता नहीं होती।*
अतः स्वयं में विश्वास रखिए और स्वयं के कर्मों में विश्वास (Faith in your deeds) रखिये, तब सफलता तो खुद आपका पता पूछते हुए आपके पास आ जाएगॉ