INDIAN RELIGIOUS BELIEFS WITH PROOF

हिंदू धर्म
(1) तो क्यों
"नासा-के-वैज्ञानिकों" ने माना की सूरज से "ॐ" की आवाज निकलती है?
(2) क्यो 'अमेरिका' ने "भारतीय - देशी  गौमुत्र "  पर  4 Patent लिया व कैंसर और दूसरी बिमारियो के लिये दवाइयां बना रहा है ? जबकी हम "गौमुत्र  का महत्व
हजारो साल पहले से जानते है,
(3) क्यों अमेरिका के 'सेटन-हाल-यूनिवर्सिटी' मे "गीता"
  पढाई जा रही है?
(4) क्यों इस्लामिक देश  'इंडोनेशिया' के Aeroplane का नाम "भगवान नारायण के वाहन गरुड" के नाम पर  "Garuda Indonesia"  है, जिसमे  garuda  का symbol भी है?
(5) क्यों इंडोनेशिया के रुपए पर  "भगवान गणेश"  की फोटो है?
(6) क्यों 'बराक-ओबामा'  हमेशा अपनी जेब में "हनुमान-जी" की फोटो रखते है?
(7) क्यों आज पूरी दुनिया  "योग-प्राणायाम"  की दिवानी है?
(8) क्यो  भारतीय-हिंदू-वैज्ञानिकों ने 'हजारो साल पहले ही ' बता दिया  की धरती गोल है ?
(9) क्यो जर्मनी के Aeroplane का संस्कृत-नाम
  "Luft-hansa" है ?
(10) क्यो हिंदुओ के नाम पर 'अफगानिस्थान'  के पर्वत का नाम "हिंदूकुश"  है?
(11) क्यो हिंदुओ के नाम पर हिंदी भाषा,हिन्दुस्तान,
हिंद महासागरये सभी नाम है?
(12) क्यो  'वियतनाम देश' में "Visnu-भगवान"  की 4000-साल पुरानी मूर्ति पाई गई?
(13) क्यो अमेरिकी-वैज्ञानिको Haward ने,शोध के बाद माना की "गायत्री मंत्र मे  " 110000 freq "
के कंपन है?
(15) अगर हिंदू-धर्म मे "यज्ञ" करना अंधविश्वास है,
तो ,क्यो  'भोपाल-गैस-कांड' मे,जो"कुशवाह-परिवार"  एकमात्र बचा, जो उस समय यज्ञ कर रहा था,
(16) 'गोबर-पर-घी जलाने से' "१०-लाख-टन आक्सीजन गैस" बनती है,
(17) क्यो"Julia Roberts" American actress and producer  ने हिंदू-धर्म अपनाया और वो हर रोज "मंदिर" जाती है,
 (18) अगर "रामायण" झूठा है तो क्यो दुनियाभर मे केवल "राम-सेतू" के ही पत्थर आज भी तैरते है?
(19) अगर  "महाभारत"  झूठा है, तो क्यो भीम के पुत्र ,
  ''घटोत्कच'' का विशालकाय कंकाल,वर्ष 2007 में
'नेशनल-जिओग्राफी' की टीम ने,'भारतीय-सेना की सहायता से' उत्तर-भारत के इलाके में खोजा?
(20) क्यो अमेरिका के सैनिकों को,अफगानिस्तान (कंधार) की एक गुफा में ,5000 साल पहले का,
महाभारत-के-समय-का "विमान"मिला है

हनुमान चालीसा में एक श्लोक है
जुग (युग) सहस्त्र जोजन (योजन) पर भानु |
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||
अर्थात हनुमानजी ने
एक युग सहस्त्र योजन दूरी पर
स्थित भानु अर्थात सूर्य को
मीठा फल समझ के खा लिया था |
1 युग = 12000 वर्ष
1 सहस्त्र = 1000
1 योजन = 8 मील
युग x सहस्त्र x योजन = पर भानु
12000 x 1000 x 8 मील = 96000000 मील
1 मील = 1.6 किमी
96000000 x 1.6 = 1536000000 किमी
अर्थात हनुमान चालीसा के अनुसार
सूर्य पृथ्वी से 1536000000 किमी  की दूरी पर है |
NASA के अनुसार भी सूर्य पृथ्वी से बिलकुल इतनी ही दूरी पर है|
इससे पता चलता है की हमारा पौराणिक साहित्य कितना सटीक एवं वैज्ञानिक है ,
इसके बावजूद इनको बहुत कम महत्व दिया जाता है |

भारत के प्राचीन साहित्य की सत्यता को प्रमाणित करने वाली ये जानकारी अवश्य शेयर करें |

BE KIND AND GENEROUS

ध्यान से सुने , अनजाने मे पाप कैसे होता है

कर्मों का फल तो झेलना पड़ेगा

एक दृष्टान्त:-

भीष्म पितामह रणभूमि में
शरशैया पर पड़े थे।
हल्का सा भी हिलते तो शरीर में घुसे बाण भारी वेदना के साथ रक्त की पिचकारी सी छोड़ देते।

ऐसी दशा में उनसे मिलने सभी आ जा रहे थे। श्री कृष्ण भी दर्शनार्थ आये। उनको देखकर भीष्म जोर से हँसे और कहा.... आइये जगन्नाथ।.. आप तो सर्व ज्ञाता हैं। सब जानते हैं, बताइए मैंने ऐसा क्या पाप किया था जिसका दंड इतना भयावह मिला?

कृष्ण: पितामह! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं। आप स्वयं ही देख लेते।

भीष्म: देवकी नंदन! मैं यहाँ अकेला पड़ा और कर ही क्या रहा हूँ? मैंने सब देख लिया ...अभी तक 100 जन्म देख चुका हूँ। मैंने उन 100 जन्मो में एक भी कर्म ऐसा नहीं किया जिसका परिणाम ये हो कि मेरा पूरा शरीर बिंधा पड़ा है, हर आने वाला क्षण ...और पीड़ा लेकर आता है।

कृष्ण: पितामह ! आप एक भव और पीछे जाएँ, आपको उत्तर मिल जायेगा।

भीष्म ने ध्यान लगाया और देखा कि 101 भव पूर्व वो एक नगर के राजा थे। ...एक मार्ग से अपनी सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ कहीं जा रहे थे।
एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला "राजन! मार्ग में एक सर्प पड़ा है। यदि हमारी टुकड़ी उसके ऊपर से गुजरी तो वह मर जायेगा।"

भीष्म ने कहा " एक काम करो। उसे किसी लकड़ी में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दो।"

सैनिक ने वैसा ही किया।...उस सांप को एक लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दिया।

दुर्भाग्य से झाडी कंटीली थी। सांप उनमें फंस गया। जितना प्रयास उनसे निकलने का करता और अधिक फंस जाता।... कांटे उसकी देह में गड गए। खून रिसने लगा। धीरे धीरे वह मृत्यु के मुंह में जाने लगा।... 5-6 दिन की तड़प के बाद उसके प्राण निकल पाए।
....

भीष्म: हे त्रिलोकी नाथ। आप जानते हैं कि मैंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया। अपितु मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा था। तब ये परिणाम क्यों?

कृष्ण: तात श्री! हम जान बूझ कर क्रिया करें या अनजाने में ...किन्तु क्रिया तो हुई न। उसके प्राण तो गए ना।... ये विधि का विधान है कि जो क्रिया हम करते हैं उसका फल भोगना ही पड़ता है।.... आपका पुण्य इतना प्रबल था कि 101 भव उस पाप फल को उदित होने में लग गए। किन्तु अंततः वह हुआ।....

जिस जीव को लोग जानबूझ कर मार रहे हैं... उसने जितनी पीड़ा सहन की.. वह उस जीव (आत्मा) को इसी जन्म अथवा अन्य किसी जन्म में अवश्य भोगनी होगी।

अतः हर दैनिक क्रिया सावधानी पूर्वक करें।.

कर्मों का फल तो भोगना  पड़ेगा

INDIAN MYTHOLOGY

एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से विडियो चैट करते वक्त पूछ बैठी-

"बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?"

बेटा बोला
"माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके बारे में सुना भी है?"
उसकी माँ मुस्कुरा कर बोली-
"मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ बेटा.. उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है।"
“हो सकता है माँ!” बेटे ने भी व्यंग्यपूर्वक कहा।
“यदि तुम कुछ होशियार हो, तो इसे सुनो..” उसकी माँ ने प्रतिकार किया। “क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है? विष्णु के दस अवतार?”
बेटे ने सहमति में कहा-
"हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?"
माँ फिर बोली-
"लेना-देना है.. मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हैं?"
“पहला अवतार था 'मत्स्य', यानि मछली। ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ। यह बात सही है या नहीं?”
बेटा अब ध्यानपूर्वक सुनने लगा..
“उसके बाद आया दूसरा अवतार 'कूर्म', अर्थात् कछुआ। क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया.. 'उभयचर (Amphibian)', तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर के विकास को दर्शाया।”
“तीसरा था 'वराह' अवतार, यानी सूअर। जिसका मतलब वे जंगली जानवर, जिनमें अधिक बुद्धि नहीं होती है। तुम उन्हें डायनासोर कहते हो।”
बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई..
“चौथा अवतार था 'नृसिंह', आधा मानव, आधा पशु। जिसने दर्शाया जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों का विकास।”
“पांचवें 'वामन' हुए, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था। क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव), और होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली।”
बेटा दशावतार की प्रासंगिकता सुन के स्तब्ध रह गया..
माँ ने बोलना जारी रखा-
“छठा अवतार था 'परशुराम', जिनके पास शस्त्र (कुल्हाड़ी) की ताकत थी। वे दर्शाते हैं उस मानव को, जो गुफा और वन में रहा.. गुस्सैल और असामाजिक।”
“सातवां अवतार थे 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम', सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति। जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।”
“आठवां अवतार थे 'भगवान श्री कृष्ण', राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी। जिन्होंने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला-फूला जा सकता है।”
बेटा सुनता रहा, चकित और विस्मित..
माँ ने ज्ञान की गंगा प्रवाहित रखी -
“नवां अवतार थे 'महात्मा बुद्ध', वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।”
“..और अंत में दसवां अवतार 'कल्कि' आएगा। वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो.. वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा।”
बेटा अपनी माँ को अवाक् होकर देखता रह गया..
अंत में वह बोल पड़ा
“यह अद्भुत है माँ.. हिंदू दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है!”

मित्रों
वेद, पुराण, ग्रंथ, उपनिषद इत्यादि सब अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का नज़रिया होना चाहिए। फिर चाहे वह धार्मिक हो या वैज्ञानिक..

LIGHT IF DIVINITY

LIGHT OF DIVINITY

18 years of agony end in 18 days

A Satsang of Sangat ji

My wife had been suffering for nearly 18 years. In 1982, she developed lymp nodes in her body, which later were found to be carrying a tubercular infection. A weak constitution and strong medicines paved the way for all forms of ailments—peptic/gastric ulcers, gall bladder stones, hiatus hernia, tumours on the ear drum, a  broid uterus and ovaries.
We tried every form of medication—allopathic, homeopathic, ayurvedic, unani—and even reiki. Nothing worked; diseases kept attacking her. My wife had to undergo five major surgeries between 1987 and 1999. She lost her appetite and was rarely able to eat a proper meal. She lost half her hearing. As per dismal astrological predictions, her life was almost over. The family felt shattered; there was no hope.
It was precisely then that divine benevolence came our way in the form of Guruji, who gave us his refuge. We learnt about Guruji through a family friend and on 20 February 2000, we got to have his first Darshan. The very first day at the sangat was in itself soothing and assuring.
Medically, my wife was prohibited from taking more than a pinch of any form of edible oil, anything spicy and had been advised not to eat after 8 pm. At the sangat, Guruji gave us a handful of oil- rich kadah prasad at around 9 pm and we ate spicy langar an hour later. Back home, we wondered how she would cope with it, for my wife would feel uneasy lying down even if she had food at 7 pm and would stay awake till past midnight. On February 20, she went to sleep immediately and slept soundly throughout.Ever since, she has been eating and digesting food without discomfort.
In the first week of March, on Maha Shivratri, we visited Bade Mandir for the first time. Guruji’s blessings, his prasad and langar took away all her diseases. She felt recharged and energized. A couple of days later, we were again amazed. We had switched on the TV, when she said we were playing it at a very high volume. This was the same person who had difficulty listening to calls due to her hearing loss.
Eighteen years of agony had ended in 18 days.That is not to say that Guruji takes or needs time to bless us. He is showering blessings all the time, but we may not be good recipients. Within a blink of the Mahapurush’s eyes, creation and destruction take place. Hundreds of thousands of souls leave their bodies and a similar number enter new ones. All that we can say is: “Tum Sam Sar Nahin Dayal, Mohe Sam Sar Papi (Just as no one can equal you in kindness, no one can compare with me in sinfulness).”

SHUKRANEY GURUJI

LOYALTY NEVER ENDS

True lovers are the ones love truly from the heart with out self-interest
If you have been to Tokyo, or heard about the places to visit in the cosmopolitan, you must have come across the story of a dog whose statue is situated at the Shibuya Crossing.
His name was Hachiko and he would wait at the station for the return of his master who was a professor.One day, the professor died and the dog had no idea but he waited and waited at the station.
Not a short period, he waited for more than 9 years. Yes 9 years.
In the beginning people didn't know why the dog was there but when they realized that he was waiting for his master, they started giving him food. He became a big sensation in Japan.
After his death there have been movies made on him, books written on him,  articles published and even till today on the 8th of May people gather at his statue and pay homage to him. In fact the culture of Japan, which support loyalty and character,regard Hachiko as the figure of loyalty. He did it just because he loved his master. The ones who serve truly from their might and know that they might not become famous, it doesn't really matter to them. Fame is never in their mind.
Impersonators repeat the same acts with the intention of grabbing the limelight. 
If you love, then do it for the feeling, not for the acknowledgement or appreciation of the nobility.