एक आदमी ने महिला से पूछा- तेरी जाति क्या है?
महिला ने पूछा : एक मां की या एक महिला की ..?
उसने कहा - चल दोनों की बता .. और मुस्कान बिखेरी महिला ने भी पूरे धैर्य से बताया.......एक महिला जब माँ बनती है तो वो जाति विहीन हो जाती है..
उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा - वो कैसे..?
जबाब मिला कि .....जब एक मां अपने बच्चे का लालन पालन करती है, अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है ,
तो वो शूद्र हो जाती है..वो ही बच्चा बड़ा होता है तो मां बाहरी नकारात्मक ताकतों से उसकी रक्षा करती है, तो वो क्षत्रिय हो जाती है..जब बच्चा और बड़ा होता है, तो मां उसे शिक्षित करती है, तब वो ब्राह्मण हो जाती है..
और अंत में जब बच्चा और बड़ा होता है तो मां
उसके आय और व्यय में उसका उचित मार्गदर्शन कर
अपना वैश्य धर्म निभाती है ..तो हुई ना एक महिला या मां जाति विहीन..उत्तर सुनकर वो अवाक् रह गया । उसकी आँखों में महिलाओं या माँओं के लिए सम्मान व आदर का भाव था और महिला को अपने मां और महिला होने पर पर गर्व का अनुभव हो रहा था।
Millions of millions years have passed and human civilization comes into existence. Existence of God is eternal truth
VICTORY OF WOMANHOOD
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LORD KRISHNA CHILDHOOD
लड्डू गोपाल, जिनका नाम ही उनके भक्तों के मुख मण्डल को प्रसन्नता से आलोकित कर देता है । एक ऐसा प्यारा सा नन्हा सा बालक जिसके एक हाथ में सदा लड्डू विराजमान रहता है, लड्डू के बिना जो एक पग भी आगे नहीं बढ़ता। जिसकी मोटी-मोटी गोल-गोल प्यारी-प्यारी आँखे सदैव लड्डू पर ही लगी रहती है, जिसका सर्वाधिक प्रिय भोग लड्डू है । लड्डू को देखते ही जिसकी आँखों में लालच दिखाई देने लगता है जीभ ओठों पर आ जाती है, लड्डू के लालच में जो कुछ भी करने को तैयार हो उनका नाम है लड्डू गोपाल । जन्म-जन्म के भूखे हैं लड्डू के लड्डू गोपाल जी, इनकी लड्डू की भूख कभी समाप्त ही नही होती । लड्डू के नाम पर कोई भी भक्त इनको कभी भी कही भी बुला सकता है, दौड़े चले आते हैं लड्डू गोपाल जी ।
किन्तु क्या लड्डू खाना और लड्डू के लिए मचलना यही लड्डू गोपाल जी का कार्य है। नही, कतापि नहीं, लड्डू गोपाल जी की महिमा अपरम्पार है। इनकी लीला और महिमा की कोई थाह नही, लड्डू गोपाल जी के चमत्कार निराले हैं । वर्तमान समय में घर-घर में लड्डू गोपाल जी विराजमान रहते है। लड्डू गोपाल जी की सेवा करना, उनसे प्रेम करना कृष्ण प्रेमियों का सबसे प्रिय कार्य है। जिस भी घर में लड्डू गोपाल जी विराजमान होते हैं उस घर परिवार के सभी लोग लड्डू गोपाल जी से बहुत प्रेम करते है और पूरे मनोयोग से उनकी सेवा करते हैं। लड्डू गोपाल जी की सेवा में जो सुख प्राप्त होता है वह उनके भक्त ही जान सकते है, ऐसा सुख मानो सुख के सागर में ही खड़े हो, एक ऐसा आलोकिक सुख जो अन्यन्त्र कही भी प्राप्त नही हो सकता।
लड्डू गोपाल जी के सभी भक्त यह भली प्रकार जानते हैं कि लड्डू गोपाल जी मात्र एक प्रतीमा ही नही हैं वह एक जीवित शक्ति है। यूं तो प्रत्येक घर में अनेक देवी-देवताओं की मूर्ती फोटो आदि होती हैं, किन्तु लड्डू गोपाल जी की प्रतीमा में थोड़ी सी सेवा और प्रेम भाव से शीघ्र ही प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है, तब लड्डू गोपाल जी घर के एक सदस्य के रूप में सदा साथ रहते है।
लड्डू गोपाल की सेवा तो अनेक घरों में कि जाती है किन्तु लड्डू गोपल जी के चमत्कार किसी-किसी को ही देखने को मिलते हैं। जिनको लड्डू गोपाल जी एक बार अपना चमत्कार दिखा दें उसका जीवन पूर्ण रूप से परिवर्तित हो जाता है। फिर लड्डू गोपाल जी उसका साथ जीवन भर नहीं छोड़ते। लड्डू गोपाल जी एक बार जिस पर रीझ जाते हैं फिर एक पल भी उसका साथ नहीं छोड़ते। कहने वाले कुछ भी कहें लेकिन यह परम सत्य है कि एक बार लड्डू गोपाल जी का मन आप पर आ गया तो फिर वह आपका दामन कभी नहीं छोड़ने वाले। वह हर पल आपके साथ ही रहेंगे।
आप विश्वाश करें या न करे किन्तु वह एक जीवित सदस्य के समान ही आपके साथ व्यव्हार करेंगे। आपके साथ आपकी थाली में आपके हाथों से भोजन करेंगे, आपके साथ आपके बाजार जायेंगे, आपके साथ खेलेंगे। आपसे कहानी सुनेंगे, आपके साथ आपके बिस्तर पर ही सोएंगे, सर्दी लगेगी तो गर्म कपडे मांगेंगे, गर्मी लगेगी तो उसकी भी शिकायत करेंगे। एक बच्चे के समान ही आपसे जिद्द भी करेंगे, तरह-तरह की खाने की वस्तुएं भी मांगेंगे। अच्छे कपडे भी पहनेंगे, आपसे लड़ेंगे भी और आपसे दुलार भी करेंगे। आपकी गोदी में बैठेंगे, आपकी बाते भी मांगेगे। इतना ही नहीं आप कहेंगे तो आपके कहे कार्य भी करेंगे। आपसे खिलोने भी मांगेंगे ना केवल अपने लिए बल्कि यदि आपके साथ बाजार में हैं तो किसी भी असहाय बच्चे के लिए भी खिलोने लेने के लिए कहेंगे। गरीबों असहायों की सेवा भी आपसे करवाएंगे। उनके लिए भोजन, वस्त्र आदि की व्यवस्था करवाएंगे। कोई गरीब यदि बीमार है तो उसके लिए आपसे दवा का प्रबन्ध भी करवाएंगे। जो लोग लड्डू गोपाल जी का ध्यान अपने पुत्र के सामान करते है लड्डू गोपाल जी उनके साथ भी पुत्र के सामान ही लाड करते हैं। घर-परिवार के सदस्य यदि लड्डू गोपाल जी के साथ घुल-मिल जाएँ तो यह इस तरह उनसे घुल-मिल जाते हैं कि उन पर किसी की डाँट का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता आप डांटते रहिये वह मुस्कराते रहेंगे। यदि आप किस बात पर रुष्ट हो जाएँ तो फिर वह आपको मनाने से भी पीछे नही हटते। हर पल खेलना, मस्ती करना, धमाल मचाना लड्डू गोपाल जी को बहुत प्रिय है। आपके साथ हर पल धमाल मचाते रहेंगे, फिर भी मन नही भरेगा।
लड्डू गोपाल जी के भक्त प्रेमियों यह मात्र काल्पनिक विवरण नही वरन एक शास्वत सत्य है। जो भी भक्त लज्जा और संकोच छोड़ कर लड्डू गोपाल जी में रम जाता है, लड्डू गोपाल जी भी उसमे उसी प्रकार से रम जाते हैं। लड्डू गोपाल जी के बहुत से भक्त लड्डू गोपाल जी को प्रसन्न करना भली प्रकार से जानते हैं किन्तु अधिकांश भक्त इस बात से अनभिज्ञ है कि लड्डू गोपाल जी की कृपा किस प्रकार प्राप्त करी जाए। लड्डू गोपाल जी को इस बात से कभी कुछ लेना देना नही कि आप उनकी पूजा, स्तुति किस प्रकार से कर रहे हो , उनको इससे भी कुछ लेना देना नही कि आप उन पर कितना पैसा ख़र्च कर रहे हो, वह इस बात पर कभी ध्यान नहीं देते कि आपने उनकी सुख-सुविधा का कितना ध्यान रखा है लड्डू गोपाल जी तो मात्र यह देखते हैं कि उनके प्रति आपकी भावना कितनी शुद्ध, श्रद्धा पूर्ण और पवित्र है। लड्डू गोपाल जी उस व्यक्ति से विशेष प्रसन्न रहते हैं जो अपने लिए नही दूसरों के लिए जीते हैं, जिनको अपने सुख की नही दूसरों के दुःख की अधिक चिंता रहती है, जो किसी के कष्ट को देखकर द्रवित होते हैं और उसका कष्ट दूर करने का प्रयास करते हैं। जो स्वयं भूंखे रहकर भी दूसरों का पेट भरते हैं। ऐसी सांसारिक तपस्या की अग्नि से शुद्ध हुआ व्यक्ति लड्डू गोपाल के पीछे नहीं दौड़ता बल्कि लड्डू गोपाल उसके पीछे दौड़ते हैं की मुझे अपना लो ! !
लड्डू गोपाल जी एक बार जिस पर प्रसन्न हो जाएं उसका जीवन हर प्रकार से सुरक्षित हो जाता है, सुख-समृद्धि, धन-वैभव की कोई कमी नही रहती। समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होती है, रोग, कष्ट, कलशों से मुक्ति प्राप्त होती है। अधिक क्या कहना उस व्यक्ति के सम्बन्ध में भला क्या कहना जिसके साथ स्वयं भगवान हो
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MAHA SHIVPURAN
गुरुजी ने शिवपुराण क्यूँ अनिवार्य बताया
1- जब हम पहली बार भगवत शिवपुराण पड़ते हैं। तो हम एक अन्धे व्यक्ति के रूप में पड़ते हैं और बस इतनाही समझ में आता है कि कौन किसके पिता, कौन किसकी बहन, कौन किसका भाई। बस इससे ज्यादा कुछसमझ नहीं आता।
2- जब हम दूसरी बार शिवपुराणपड़ते हैं, तो हमारे मन में सवाल जागते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया या उन्होंने वैसा क्यों किया ?
3- जब हम तीसरी बार शिवपुराण को पड़ेगें, तो हमे धीरे-धीरे उसके मतलब समझ में आने शुरू हो जायेंगे। लेकिन हर एक को वो मतलब अपने तरीके से हीसमझमें आयेंगे।
4- जब चोथी बार हम शिवपुराण को पड़ेगे, तो हर एक पात्र की जो भावनायें हैं, इमोशन... उसको आप समझ पायेगें कि किसके मन में क्या चल रहा है। जैसे विष्णु जी के मन में क्या चल रहा है या बरमहा जी केमन में क्या चल रहा है ? इसको हम समझ पाएंगे।
5- जब पाँचवी बार हम शिवपुराण को पड़ेगे तो पूरा कैलाश हमारे मन में खड़ा होता है, तैयार होता है,हमारे मन में अलग-अलग प्रकार की कल्पनायें होती हैं।
6- जब हम छठी बार शिवपुराण को पढ़ते हैं, तब हमें ऐसा नही लगता की हम पढ़ रहें हैं... हमे ऐसा ही लगता है कि कोई हमें ये बता रहा है।
7- जब सातवी बार शिवपुराण को पढ़ेंगे, तब हम नंदी बन जाते हैं और ऐसा ही लगता है कि सामने वो ही भगवान शिवजी हैं, जो मुझे ये बता रहें हैं।
8- और जब हम आठवी बार शिवपुराणपड़ते हैं, तब यह एहसास होताहै कि शिवजी कहीं बाहर नही हैं, वो तो हमारे अन्दर हैं और हम उनके अन्दर हैं।जब हम आठ बार शिवपुराण पड़ लेगें तब हमें शिवपुराण का महत्व पता चलेगा | कि इस संसार में अलग कुछ है ही नहीं और इस संसार में गुरु ही हमारे मोक्ष का सबसे सरल उपाय है। शिवपुराण में ही मनुष्य के सारे प्रश्नों केउत्तर लिखें हैं। जो प्रश्न मनुष्य ईश्वर से पूछना चाहता है। वोसब शिवपुराण में सहज ढंग से लिखें हैं। मनुष्य की सारी परेशानियों के उत्तर लिखें हैं, अमृत है।
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God's grace
कन्धे पर कपड़े का थान लादे और हाट-बाजार जाने की तैयारी करते हुए नामदेव जी से पत्नि ने कहा- भगत जी! आज घर में खाने को कुछ भी नहीं है।
आटा,नमक,दाल,चावल,गुड़ और शक्कर सब खत्म हो गए हैं।शाम को बाजार से आते हुए घर के लिए राशन का सामान लेते आइएगा। भक्त नामदेव जी ने उत्तर दिया- देखता हूँ जैसी विठ्ठल जी की कृपा।। अगर कोई अच्छा मूल्य मिला,तो निश्चय ही घर में आज धन-धान्य आ जायेगा।पत्नि बोली संत जी! अगर अच्छी कीमत ना भी मिले,तब भी इस बुने हुए थान को बेचकर कुछ राशन तो ले आना।घर के बड़े-बूढ़े तो भूख बर्दाश्त कर लेंगे।पर बच्चे अभी छोटे हैं,उनके लिए तो कुछ ले ही आना।जैसी मेरे विठ्ठल की इच्छा।ऐसा कहकर भक्त नामदेव जी हाट-बाजार को चले गए।
बाजार में उन्हें किसी ने पुकारा- वाह सांई! कपड़ा तो बड़ा अच्छा बुना है और ठोक भी अच्छी लगाई है।
तेरा परिवार बसता रहे।ये फकीर ठंड में कांप-कांप कर मर जाएगा।दया के घर में आ और रब के नाम पर दो चादरे का कपड़ा इस फकीर की झोली में डाल दे।
भक्त कबीर जी- दो चादरे में कितना कपड़ा लगेगा फकीर जी? फकीर ने जितना कपड़ा मांगा,इतेफाक से भक्त नामदेव जी के थान में कुल कपड़ा उतना ही था।
और भक्त नामदेव जी ने पूरा थान उस फकीर को दान कर दिया।दान करने के बाद जब भक्त नामदेव जी घर लौटने लगे तो उनके सामने परिजनो के भूखे चेहरे नजर आने लगे।फिर पत्नि की कही बात,कि घर में खाने की सब सामग्री खत्म है।दाम कम भी मिले तो भी बच्चो के लिए तो कुछ ले ही आना।अब दाम तो क्या,थान भी दान जा चुका था।भक्त नामदेव जी एकांत मे पीपल की छाँव मे बैठ गए।जैसी मेरे विठ्ठल की इच्छा।जब सारी सृष्टि की सारी पूर्ति वो खुद करता है,तो अब मेरे परिवार की सार भी वो ही करेगा।और फिर भक्त नामदेव जी अपने हरिविठ्ठल के भजन में लीन गए।
अब भगवान कहां रुकने वाले थे।भक्त नामदेव जी ने सारे परिवार की जिम्मेवारी अब उनके सुपुर्द जो कर दी थी।अब भगवान जी ने भक्त जी की झोंपड़ी का दरवाजा खटखटाया।नामदेव जी की पत्नी ने पूछा- कौन है?नामदेव का घर यही है ना,भगवान जी ने पूछा।
अंदर से आवाज हां जी यही आपको कुछ चाहिये
भगवान सोचने लगे कि धन्य है नामदेव जी का परिवार घर मे कुछ भी नही है फिर ह्र्दय मे देने की सहायता की जिज्ञयासा हैlभगवान बोले दरवाजा खोलिये लेकिन आप कौन? भगवान जी ने कहा- सेवक की क्या पहचान होती है भगतानी? जैसे नामदेव जी विठ्ठल के सेवक,वैसे ही मैं नामदेव जी का सेवक हूl ये राशन का सामान रखवा लो।पत्नि ने दरवाजा पूरा खोल दिया।
फिर इतना राशन घर में उतरना शुरू हुआ,कि घर के जीवों की घर में रहने की जगह ही कम पड़ गई।इतना सामान! नामदेव जी ने भेजा है?मुझे नहीं लगता।पत्नी ने पूछा।भगवान जी ने कहा- हाँ भगतानी! आज नामदेव का थान सच्ची सरकार ने खरीदा है।
जो नामदेव का सामर्थ्य था उसने भुगता दिया।
और अब जो मेरी सरकार का सामर्थ्य है वो चुकता कर रही है।जगह और बताओ।सब कुछ आने वाला है भगत जी के घर में।शाम ढलने लगी थी और रात का अंधेरा अपने पांव पसारने लगा था।सामान रखवाते-रखवाते पत्नि थक चुकी थीं।बच्चे घर में अमीरी आते देख खुश थे।वो कभी बोरे से शक्कर निकाल कर खाते और कभी गुड़।कभी मेवे देख कर मन ललचाते और झोली भर-भर कर मेवे लेकर बैठ जाते।उनके बालमन अभी तक तृप्त नहीं हुए थे।भक्त नामदेव जी अभी तक घर नहीं आये थे,पर सामान आना लगातार जारी था।
आखिर पत्नी ने हाथ जोड़ कर कहा- सेवक जी! अब बाकी का सामान संत जी के आने के बाद ही आप ले आना।हमें उन्हें ढूंढ़ने जाना है क्योंकी वो अभी तक घर नहीं आए हैं।भगवान जी बोले- वो तो गाँव के बाहर पीपल के नीचे बैठकर विठ्ठल सरकार का भजन-सिमरन कर रहे हैं।अब परिजन नामदेव जी को देखने गये सब परिवार वालों को सामने देखकर नामदेव जी सोचने लगे,जरूर ये भूख से बेहाल होकर मुझे ढूंढ़ रहे हैं।इससे पहले की संत नामदेव जी कुछ कहते उनकी पत्नी बोल पड़ीं- कुछ पैसे बचा लेने थे। अगर थान अच्छे भाव बिक गया था,तो सारा सामान संत जी आज ही खरीद कर घर भेजना था क्या? भक्त नामदेव जी कुछ पल के लिए विस्मित हुए।फिर बच्चों के खिलते चेहरे देखकर उन्हें एहसास हो गया,कि जरूर मेरे प्रभु ने कोई खेल कर दिया है। पत्नि ने कहा अच्छी सरकार को आपने थान बेचा और वो तो समान घर मे भेजने से रुकता ही नहीं था।पता नही कितने वर्षों तक का राशन दे गया।उससे मिन्नत कर के रुकवाया- बस कर! बाकी संत जी के आने के बाद उनसे पूछ कर कहीं रखवाएँगे।
भक्त नामदेव जी हँसने लगे और बोले- ! वो सरकार है ही ऐसी।जब देना शुरू करती है तो सब लेने वाले थक जाते हैं।उसकी बख्शीश कभी भी खत्म नहीं होती।
वह सच्ची सरकार की तरह सदा कायम रहती है।
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Do good find good
एक बीबी थी। बहुत ज्यादा भजन सिमरन करना सेवा करनी किसी को कभी गलत न बोलना, सब से प्रेम से मिलकर रहना उस की आदत बन चुकी थी। वो सिर्फ एक चीज़ से दुखी थी के उस का आदमी उस को रोज़ किसी न किसी बात पर लड़ाई झगड़ा करता। उस आदमी ने उसे कई बार इतना मारा की उस की हड्ड़ी भी टूट गई थी। लेकिन उस आदमी का रोज़ का काम था, झगडा करना.
उस बीबी ने गुरु जी से प्रार्थना की हे सच्चे पातशाह मेरे से कोंन भूल हो गई है। मै सत्संग भी जाती हूँ सेवा भी करती हूँ। भजन सिमरन भी आप के हुक्म के अनुसार करती हूँ। लेकिन मेरा आदमी मुझे रोज़ मारता है। मै क्या करूँ.
गुरु जी ने कहा क्या वो तुझे रोटी देता है बीबी ने कहा हाँ जी देता है.
गुरु जी ने कहा फिर ठीक है। कोई बात नहीं
उस बीबी ने सोचा अब शायद गुरु की कोई दया मेहर हो जाए और वो उस को मारना पीटना छोड़ दे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उस की तो आदत बन गई ही रोज़ अपनी घरवाली की पिटाई करना.
कुछ साल और निकल गए उस ने फिर गुरु जी से कहा की मेरा आदमी मुजे रोज़ पीटता है। मेरा कसूर क्या है?
गुरु जी ने फिर कहा क्या वो तुम्हे रोटी देता है। उस बीबी ने कहा हांजी देता है। तो गुरु जी ने कहा फिर ठीक है। तुम अपने घर जाओ। बीबी बहुत निराश हुई कि गुरु जी ने कहा ठीक है। वो घर आ गई लेकिन उस के पति के सवभाव वैसे का वैसा रहा रोज़ उस ने लड़ाई झगडा करना। वो बीबी बहुत तंग आ गई.
कुछ साल गुज़रे फिर गुरु जी के पास गई के वो मुझे अभी भी मारता है। मेरी हाथ की हड्डी भी टूट गई है। मेरा कसूर क्या है? मै सेवा भी करती हूँ। सिमरन भी करती हूँ फिर भी मुझे जिंदगी में सुख क्यों नहीं मिल रहा गुरु जी महाराज ने फिर कहा वो तुजे रोटी देता है, उस ने कहा हांजी देता है, गुरु जी ने कहा फिर ठीक है..
इस बार वो बीबी जोर जोर से रोने लगी और बोली की गुरु जी मुझे मेरा कसूर तो बता दो मैंने कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है..
गुरु जी कुछ देर शांत हुए और फिर बोले
बीबी तेरा घरवाला पिछले जनम में तेरा बेटा था। तू उस की सोतेली माँ थी। तू रोज़ उसको सुबह-शाम मरती रहती थी। और उस को कई कई दिन तक भूखा रखती थी। शुक्र मना के इस जनम में वो तुझे रोटी तो दे रहा है। ये बात सुन कर बीबी एक दम चुप हो गई गुरु जी महाराज ने कहा बेटा जो करम तुमने किए है उस का भुगतान तो करना ही पड़ेगा ना.
फिर उस बीबी ने कभी गुरु जी से शिकायत नहीं की क्यों की वो सच को जान गई थी.
इसलिए हमें भी कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए सब से प्रेम प्यार के साथ रहना चाहिए.
हमारी जिन्दगी में जो कुछ भी हो रहा है सब हमारे कर्मो का लेखा जोखा है। जिस का हिसाब किताब तो हमें देना ही पड़ेगा!!
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