जो मांगो अपने गुरु से मांगो









यदि आपका मन अपने गुरु के अंदर समाया हुआ है तो आप जो भी गुरु से मांगेंगे वह आपको मिलेगा सबसे बड़ा सुख गुरु के होने का यही है कि आपका मन शांत और सुखी रहता है आपका मन विचलित नहीं होता  आप किसी काम को करने से बिल्कुल नहीं डरते हैं क्योंकि आपको पता है कि आपका गुरु उस कार्य को संभालने में समर्थ है और विकट से विकट परिस्थिति में आपके साथ है तो आप उस कार्य को करने में निष्फल नहीं होते है।गुरु से मांगी कोई भी याचना कभी खाली नहीं जाती गुरु आपको आपकी सामर्थ्य से भी अधिक दे देता है क्योंकि गुरु आपकी अंतर्मन की चेतना को समझ लेता है और उन को साकार रूप देने में जो भी परिस्थितियां बनती है उनको बनाता चला जाता है जिसके जाल में हम अपने आप ही बने रहते हैं और उसमें पूरी तरह से मग्न हो जाते हैं यदि हम गुरु को ही मांग ले तो शायद हमारे को भौतिक चीजों की आवश्यकता है यही नहीं होगी क्योंकि जो मन को चाहिए वह नैतिक शिक्षा चाहिए ना कि भौतिक शिक्षा जो पूरे समाज के विघटन का कारण होती है क्योंकि मानव की इच्छाएं अनंत यार उसका कोई अंत नहीं है उनको पूरा करने के लिए इसके द्वारा किए गए कार्य कभी भी सीधे और सरल नहीं रह पाती परंतु गुरु की शरण में जाने पर सभी कार्य बेहद ही सरल और साधारण तरीके से पुरे होते हैं इसका इंसान कभी गुमान भी नहीं कर सकता

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