सतत जीवन चाहिए तो सरल बनो

यदि व्यक्ति को अपना जीवन सतत यानी कि निरंतर प्रगतिशील और उन्नति मान बनाना है तो उसे सरल बने रहना पड़ेगा जैसे गांव का साधारण किसान जिस मस्ती और जिस भावना से अपना जीवन बिता पर है उसके मन में कोई विस्तरण आया लालसा नहीं होती जिसके कारण वह अपने जीवन को निश्चल और शांत भाव से बिताता है जबकि भौतिक वस्तुओं से गिरा इंसान अपने आप को इच्छाओं के जाल में इस प्रकार समेट लेता है कि उसकी जीवन सरल ना रहकर विकट और दुष्कर् जाता है अपने आप को सरल बनाए रखने के लिए ठीक हूं सरल भाव का होना भी जरूरी है यदि उसकी भावना सरल और सुगम है तो उसकी सोच और उसकी मानसिक अवस्था भी संतोष वाली रहेगी और उसको किसी चीज का नुकसान या फायदा नहीं होगा क्योंकि वह उन परिस्थितियों में भी अपने आप को सरल बनए रखता है जिस प्रकार की शान फसल बोने के बाद अपनी उम्मीद है भगवान के ऊपर छोड़ देता है जिसके कारण हो सरल रहता है और उसको देव इच्छा के द्वारा वही प्राप्त होते हैं जो उसके निष्काम फल का प्रतीक होता हैयदि आप इस लेख से सहमत हैं या असहमत हैं तो कृपया अपने कमेंट जरूर करें ताकि आने वाले लेखों में उसका ध्यान रखा जा सके

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