True story of cooperation and support

जब एक छिपकली कर सकती है, तो हम क्यों नहीं?

[यह जापान में घटी, एक सच्ची घटना है।]

अपने मकान का नवीनीकरण करने के लिये, एक जापानी अपने मकान की दीवारों को तोड़ रहा था। जापान में लकड़ी की दीवारों के बीच ख़ाली जगह होती हैं, यानी दीवारें अंदर से पोली होती हैं।

जब वह लकड़ी की दीवारों को चीर-तोड़ रहा था, तभी उसने देखा कि दीवार के अंदर की तरफ लकड़ी पर एक छिपकली, बाहर से उसके पैर पर ठुकी कील के कारण, एक ही जगह पर जमी पड़ी है।

जब उसने यह दृश्य देखा तो उसे बहुत दया आई पर साथ ही वह जिज्ञासु भी हो गया। जब उसने आगे जाँच की तो पाया कि वह कील तो उसके मकान बनते समय पाँच साल पहले ठोंका गई थी!

एक छिपकली इस स्थिति में पाँच साल तक जीवित थी! दीवार के अँधेरे पार्टीशन के बीच, बिना हिले-डुले? यह अविश्वसनीय, असंभव और चौंका देने वाला था!

उसकी समझ से यह परे था कि एक छिपकली, जिसका एक पैर, एक ही स्थान पर पिछले पाँच साल से कील के कारण चिपका हुआ था और जो अपनी जगह से एक इंच भी न हिली थी, वह कैसे जीवित रह सकती है?

अब उसने यह देखने के लिये कि वह छिपकली अब तक क्या करती रही है और कैसे अपने भोजन की जरुरत को पूरा करती रही है, अपना काम रोक दिया।

थोड़ी ही देर बाद, पता नहीं कहाँ से, एक दूसरी छिपकली प्रकट हुई, वह अपने मुँह में भोजन दबाये हुये थी - उस फँसी हुई छिपकली को खिलाने के लिये! उफ़्फ़! वह सन्न रह गया! यह दृश्य उसके दिल को अंदर तक छू गया!

एक छिपकली, जिसका एक पैर कील से ठुका हुआ था, को, एक दूसरी छिपकली पिछले पाँच साल से भोजन खिला रही थी!

अद्भुत! दूसरी छिपकली ने अपने साथी के बचने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, वह पहली छिपकली को पिछले पाँच साल से भोजन करवा रही थी।

अजीब है, एक छोटा-सा जंतु तो यह कर सकता है, पर हम मनुष्य जैसे प्राणी, जिसे बुद्धि में सर्वश्रेष्ठ होने का आशीर्वाद मिला हुआ है, नहीं कर सकता!

कृपया अपने प्रिय लोगों को कभी न छोड़ें! लोगों को उनकी तकलीफ़ के समय अपनी पीठ न दिखायें! अपने आप को महाज्ञानी या सर्वश्रेष्ठ समझने की भूल न करें! आज आप सौभाग्यशाली हो सकते हैं पर कल तो अनिश्चित ही है और कल चीज़ें बदल भी सकती हैं!

आपकी एक छोटी-सी लापरवाही भी, आपके उस प्रिय का दिल तोड़ सकती है, जिसने तमाम अड़चनों और अवरोधों के बावजूद आपको चाहा था!

कुछ भी कहने से पहले, एक बार जरुर याद रखें कि-

कुछ भी बनाने के लिये पूरा जीवन भी लग सकता है पर उसे तोड़ने में एक पल भी नहीं लगता।

प्रकृति ने हमारी अंगुलियों के बीच शायद जगह भी इसीलिये दी है ताकि हम किसी दूसरे का हाथ थाम सकें!

आप आज किसी का साथ दीजिये, कल कोई-न-कोई दूसरा आपको साथ दे देगा!

एक-दूसरे को पसंद कीजिये!

Spirituality provides peace of mind

Being a civilized person , every one has to work for life and livelihood. Due to overload work and very business he becomes restless and  uncomfortable. He finds no way to come out from this situation. He wants to live comfortably but due to social pressure and career tension make him more aggressive and restless . How can a person comes out from such situation??? This is a very difficult question to answer.  Sprituality and faithfulness in God can make a life better. More expectations and lust full nature is the only reason of tension and fear. When person has  a bent of mind towards sprituality . He will spend his time with very easy and soothing way. Sprituality will give him a way to come out from tension full life. Positivity and spirituality give a soothing effect on everyone's life. Those people who live around you should have also same way of life as you want to live. While going to temple or any religious place will give us strength to face the challenges of life with firm and strong mind.

Obesity is a curse for health

I salute those who keep their weight under control and live a very good life. Obesity is the worst form of life . When a person who has obesity is burden on himself and other members of his family. He survives due to only medicines. He never pays attention towards his food. He ignores food quantity and takes delicious food due to greed. Life becomes hell due to obesity. Obesity not only brings diseases but also many other problems which create unseen and untold difficulties of life. According to me the rich becomes more fat due to taking over eating. Overweight people never care about food quantity and always hungry for taking delicious and tasty food items and become weak things of many diseases. There is only one solution to keep weight under control by taking more water and salad before taking lunch or dinner. Other option to keep weight under control is jogging and walking. I have seen many people who have very under weight leave a long and very comfortable life even after age of 60 or 65 they move very easily and work with pride. Slim and energetic people always keep their weight under control. You will not find overweight people in garden walking or doing jogging because they become very lazy and lethargic and unable to get up quickly for doing any work.

Health is God's best gift

We should be thankful to God for good health because without health a person cannot survive well . He cannot move and  cannot enjoy his life. When a person is sick he is unable to do anything without anyone' help. Health is the best gift of God. How can we leave a happy life if we are healthy and we care about our health. we can enjoy our life with all materialistic and spiritual matters comfortably. According to me money cannot give you a real pleasure until you have good health. these things are materialistic. Health keeps us busy in our daily life. We should avoid those things which increases our weight and risk for life. We should eat according to our need not for greed. Some people are very greedy to take a good amount of food to become healthy as well as fat. Due to prosperity they have enough money to spend on eatable things song readymade food, fast food and such food which increase our weight. Those people who have good weight cannot move and enjoy their life comfortablely.

GURUJI ka shukrana

गुरूजी के 105 वचन जो उन्होंने समय समय पर कहे । आज भी ये वचन हमारा मार्गदर्शन करते हैं ।
गुरु जी वचन
1. "- गुरुजी
गुरुजी हमेशा इस दैवीय गद्दी पर रहेगे | उन्होंने कहा मै था, मै हूँ और मै हमेशा रहूँगा | मेरा कोई वारिस नही है |
2. " - गुरुजी
मेरे लिए मेरा परिवार भी संगत ही है और किसी के पास कोई रूहानी शक्ति नही है |
3.  - गुरुजी
मै अपने भगतों से बहुत प्यार करता हूँ और उनका बुरा वक्त ख़तम करता हू |
4. "  - गुरुजी
जब आप अपने जूते मंदिर के बाहर उतारते हो तो अपनी बुद्धि भी बाहर ही छोड कर आया करो, वो मेरे सामने किसी काम की नही है |
5. " - गुरुजी
मेरी उपस्थिति मे सेलफोन का प्रयोग मत करो वरना तुम्हारा आशीर्वाद उसे चला जायगा जिस से आप बात करोगे |
6. "  - गुरुजी
अगर आप अपनी ज़िन्दगी की लगाम मुझे सौप देते हो तो मै तुम्हे सीधा मोक्ष तक ले जाता हूँ ।
7. " - गुरुजी
अगर किसी घर से सिर्फ एक सदस्य भी मेरे पास आ जाता है तो पुरे परिवार को आशीर्वाद मिल जाता है |
8. "- गुरुजी
सिर्फ किताब से पाठ करना ही पाठ नही होता, अपना काम करना, नित नियम करना और अपने परिवार का धयान करना भी पाठ करना होता है |
9. " - गुरुजी
सबसे बडा पाठ तब होता है जब पति पत्नी की और पत्नी पति की तथा दोनो मिलकर बच्चों की अच्छे से देखभाल करते है और घर मे शांति बनाए रखते है |
10. " - गुरुजी ने मुझे कहा और पीछे मुडकर किसी से कहा "चल भाई लता मंगेशकर दा गाना लगा" हम सुनने लगे....... फिर गुरुजी ने कहा "किन्ना सोना गांदी है ना आशा भोसले ?" ऐसे मे कोई क्या कहता, हम चुप रहे | गुरुजी ने अपना प्रश्न फिर दोहराया मैने कहा जी गुरुजी (ये सोच कर की गुरुजी कहते है गुरुआ नु कोंटराडिक्ट नही करदे)
11. "रब कदे वी नजर नही आन्दा” -  गुरुजी
मै केहा “मैनु त्वाडे विच नजर आन्दा है "
तुम कभी भगवान को नही देख पाते, मैने कहा मुझे आप मे नजर आते है, और वो मुस्कुरा दिए |
12. "रब नु प्यार करो, ओदे कोलो डरो ना" - गुरुजी |
भगवान ने ही तो संसार बनाया है, सोलर सिस्टम बनाया है और सब कुछ उस परम पिता परमेश्वर ने ही तो बनाया है इसीलिए भगवान से प्यार करो, भगवान से डरो मत |
13. "" - गुरुजी |
महापुरुषों के ओहदे होते है और उनमे सबसे उपर सतगुरु होते है और वो मै हूँ | सिर्फ एक सतगुरु ही सबके मर्ज़ अपने उपर ले सकते है और उन्हें दुखो से मुक्त कर सकते है | हर कोई लोगो के मर्ज़ (बीमारियाँ) अपने उपर नही ले सकता है, उन्हें हुकम नही है, वो सिर्फ लोगो का मार्गदर्शन कर सकते है | ऐसा मनुष्य किस काम का अगर वो भगवान का शुकराना ना कर सके |
14. " - गुरुजी
कभी किसी की देखा देखी अपनी चादर के बाहर पैर नही पसारने चाहिए |
15. " - गुरुजी
पंडितों पर अन्धविश्वास नही करना चाहिए | अगर कोई ऐसा मिल गया जिसे पूरा ज्ञान नही है तो आपका नुकसान हो सकता है | मैने कहा की हम पंडितों के नही जाते तो गुरुजी ने कहा की मै आम बात कर रहा हूँ |
16. " - गुरुजी |
अपनी खुशहाली के लिए birth stone कभी मत पहनो, कोई पत्थर उलटा असर कर रहा हो तब क्या ? मैने गुरुजी से कहा कि हम चारो (मै, मेरे पति तथा दोनो बच्चे) ने कभी birth stone नही पहने | गुरुजी ने कहा की मै आम बात कर रहा हूँ |
17.  - गुरुजी |
गणेश जी का स्थान मंदिर में है ना की लोगों के घरों के फर्शों पर यां सजावटी समान की तरह और कई बार पेपर वेट की तरह|
18. “- गुरुजी
आप सब करोड़ों रुपये खर्चा कर के अपने घरों को सजाने के लिए जो पेंटिंग्स ले आते हो, तुम्हे क्या पता अगर वो अपने साथ उस पेंटर की नेगेटिविटी भी तुम्हे दे रही हो | मैंने गुरुजी से कहा कि गुरुजी मेरी इतनी समर्थ नही है की मैं करोड़ों रुपये की पेंटिंग्स खरीद सकूँ तो उन्होने कहा "ओ हो मैं आम बात कर रहा हूँ |
19. “ - गुरुजी
अगर कोई दूर है और मेरे पास या बड़े मंदिर नही पहुँच सकता, वो मेरी फोटो से बात करे, मैं सबकी बात सुनता हूँ |
20. "  - गुरुजी
गुरुजी के वचनों पर आपस में तर्क-वितर्क करना माना है,  उससे हम अपने भगवान प्राप्ति, अपने लक्ष्य से चुक जायेंगे |
21. गुरु जी ने इंग्लिश में कहा "only dead fish swim with the tide".  एक मरे ज़मीर वाला इंसान ही दुनिया के ग़लत रास्ते पर चलता है | हमें ग़लत हालात से समझोता ना करके, सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए |
"self praise is no praise". अपनी बढाई आप नही करनी |
"health is your real wealth".  तुम्हारी असली दौलत सेहत है |
"keep your ego in control". अपने अहंकार को वश में करके रखो |
"life is not easy" I was told by Guruji, but prayer can sort out anything. "Those who pray are blessed". ज़िन्दगी आसान नही है | दुआ हर मसले का हल है |

"Too much of everything is bad". किसी भी चीज़ को बहुत ज़्यादा करना, अच्छा नही |

22. "डाक्टर अपना कम करन्गे मैं अपना". - गुरुजी
जब कभी कोई परेशानी हो तो डाक्टर को अपना काम करने दो मैं अपना काम करूँगा |

23. " - गुरुजी
दवाई भी तभी काम करेगी जब मैं उसे आशीर्वाद दूंगा |

24. " - गुरुजी
पानी बहुत पिया करो, अगर डाक्टर ये सब बता दें तो उसके पास कौन जाएगा, पानी हर बीमारी की दवा है और सब रोग ठीक करता है |

25. “ - गुरुजी
पाचक-ग्रंथि एक ऐसा अंग है जिसकी प्रकिया भगवान ने अपने हाथ में रखी है |

26. " - गुरुजी
बहत अच्छे दर्शन हो रहे हैं अभी, बाद में मैं तारों जैसा नज़र आऊंगा, मंदिर में आने वाली संगत इतनी बढेगी की जितनी मर्ज़ी  जगह बढा लो कम ही पड़ेगी |

एक समय वो भी था जब गुरुजी सबसे नही मिलते थे, जिससे वो मिलना चाहते उसे वो खुद बुला लेते थे  |

27. " - गुरुजी
आने वाला समय बहुत खराब आ रहा है, जो प्रार्थना में विश्वास करेगा और पुरे मन से प्रार्थना करेगा वो ही बच पाएगा |

28. " - गुरुजी
जिसे हम प्यार से गुरुजी का आश्रम (बड़े मंदिर) कहते हैं वहां आने से बारह तीर्थ स्थानों का पुण्य एक साथ मिलता है तथा मेरा आशीर्वाद भी मिलता है ऐसा गुरुजी का कहना था |

29. " - गुरुजी
बड़े मंदिर में कभी भी सोना नही चाहिए, वरना गुरुजी का आशीर्वाद अधूरा रह जाता है |

30. " - गुरुजी
गुरु को कभी चिट्ठी नही लिखनी चाहिए, हमेशा खुश रहा करो....... जो होगा अच्छा ही होगा |

31. " – गुरुजी
मैं हड्डी और माँस का इंसान बना सामने बैठा हूँ, लोगों ने इंसान ही समझ लिया |

32.  गुरुजी
लोगों को बाद में समझ आएगी की मैं क्या हूँ
| 33.  - गुरुजी
मैंने बहुत कठिन तप किया है पत्तों पर निर्वाह (गुज़ारा) किया है,  तुम्हे पता है कितना मुश्किल होता  है ? गुरु का स्थान इतना बड़ा होता है की अगर वो चाहे तो एक ही समय में वो कई जगह पर एक साथ उपस्थित हो सकते हैं |

34. " - गुरुजी
मैं तुम्हे इंसान की तरह नज़र आता हूँ, पर मैं जहाँ खड़ा हूँ वहा से तुम सब मुझे छोटी छोटी चींटी जैसे नज़र आते हो |

35. " - गुरुजी
मैं इस ससार में तुम्हे माफ़ करने ही तो आया हूँ |

36. " - गुरुजी 
मेरे पास इतनी शक्ति है की  मैं सूरज को भी अपने अनुसार चला सकता हूँ |

37. “ – गुरुजी
सूरज अब बुढ्ढा हो चुका है |

38. ” – गुरुजी
धरती पर पानी बढ जायगा |

39. “ - गुरुजी
लोग पेड़ काटते हैं, अच्छी बात नही है |

40. "  - गुरुजी  
मेरे पास आने वाला रास्ता आसान नही है |

41. “ – गुरुजी
मैं नींबू की तरह निचोड़ लेता हूँ, तम्हारी हर तरह से परीक्षा लेता हूँ, अगर पूर्ण आत्म समर्पण नही करते तो फिर क्या फायदा ?

42. " - गुरुजी
अगर कोई मेरी तरफ एक कदम भी बढता है तो मैं उसकी तरफ सौ कदम बढता हूँ |

43. "- गुरुजी
लंगर और चाय प्रसाद तो तुम्हारी दवाई है और सब रोगों को ठीक करते हैं । इन्हें प्रसाद की तरह देखो, ना की इन्हे बनाने वाले पदार्थों की तरह |  लंगर और चाय प्रसाद तो तुम व्रत में भी खा सकते हो | जब किसी परिवार का कोई एक सदस्य भी लंगर और चाय प्रसाद ख़ाता है तो, घर के बाकी सदस्य चाहे घर पर हों या अस्पताल में, सब को मेरा आशीर्वाद मिलता है |

44. " - गुरुजी
लंगर और चाय प्रसाद में मेरा आशीर्वाद होता है उसे यही (बड़े मंदिर) पूरा खाना चाहिए, कछ बचना नही चाहिए |  अगर उसे यहाँ खाओ तो दवाई है। घर ले जाओ तो मिठाई है।

45. " - गुरुजी
लंगर प्रसाद को दोबारा गरम नही करना चाहिए |

46. " - गुरुजी मेरे आशीर्वाद देने के बड़े तरीके हैं, उनमे से एक सत्संग करना भी है, जो बोलता है उसका भी भला होता है और जो उस सत्संग को सुनता है उसका भी भला होता है | जब आप अपने गुरु के द्वारा किये कल्याण को सब को सुनाते हो तो आप भी आशीर्वाद पाते हो और सुनने वाला भी आशीर्वाद पाता है | कभी कभी तो गुरुजी हमें दूर रख कर भी आशीर्वाद देते हैं |

47.  - गुरुजी
गुरुजी कब और क्या कल्याण करते हैं ज़रूरी नही है कि हमें पता हो |

48.  " - गुरुजी
ऐसा गुरु मिलेगा कहीं, मैं प्रवचन में विश्वास नही करता हूँ, सब कल्याण वास्तव में कर के दिखाता हूँ |

49. “ - गुरुजी
सबसे अच्छे  रंग जो सकारात्मकता (पाजिटिविटी) और समृद्धि पैदा करते हैं वो हैं लाल, क्रीम और काला, और इनके बाद आते हैं केसरिया, संतरी, गलाबी, पीला, हरा, जामनी और सफ़ेद | गूढ़ नीला रंग गुरुओ का रग नही होता, इसे इस्तेमाल नही करना  चाहिए, ये पहनने वाले को नकारात्मकता और भ्रांतियां पैदा करता है | फिरोजी, आसमानी और नेवी ब्लू रंग अच्छे होते हैं, ये इस्तेमाल कर सकते हैं | मैंने पूछा क्या ये आपने मेर परिवार के लिए कहा है तो गुरुजी का जवाब था,"जो सुन ले उसका भला" |

50.  - गुरुजी
आप को अपने आँख, नाक, कान सब चेहरे पर आगे मिले हैं पीछे नही, इस बात का भगवान को बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहिए |

51. " - गुरुजी
जानवर कितने काम करते हैं, मरने के बाद भी हम उनकी खाल से चमड़े के बेग, जुते, बेल्ट आदि बनाते हैं यहाँ तक की मरने के बाद उसे खा भी लेते हैं, पर इंसान मरने के बाद किसी काम का नही है इसीलिए इंसान अपने जीते जी सिर्फ पाठ करके अपना जन्म संवार सकता है | 

52. गुरुजी के अनुसार गुरुजी के वचन याद करना भी संगत करना होता है | अपने व्यक्तिगत अनुभव और आशीर्वाद जो आप को गुरुजी से मिले, उनके बारे में सब को बताना भी एक तरह से गुरुजी को शुकराना करना ही होता है | अक्सर गुरुजी कहते थे कि "मैंने जो तम्हारे कल्याण किये हैं सब को बताओ" ।

53. " - गुरुजी
अगर मैंने सिर्फ एक इंसान को भी भगवान तक पहुँचने के रास्ते पर डाला, तो मेरा काम हो गया समझो |

54.  – गुरुजी
अगर आपके काम अच्छे हैं तो दुनिया के सब सुख गुरुजी आपकी झोली में डाल देंगे |

55. " - गुरुजी कभी भी अपना बुरा नही मांगनी चाहिए, गुरुजी के साथ क्रय-विक्रय नही चलता जैसे आप मुझे ये दोगे तो मैं इतने का प्रसाद चढाऊंगा, हम अपने परम पिता परमेश्वर को कछ नही दे सकते, अगर हम सेवा भी करते हैं तो वो भी अपनी मदद ही करते हैं ना की गुरुजी की |

56. एक बार एक छोटे पाठी (गरुद्वारे में ग्रन्थ साहब का पाठ करने वाले) ने गुरुजी से कहा की उसकी ज़िन्दगी में कछ भी ठीक नही है, पैसे नही हैं | गुरुजी ने जवाब दिया" जद लोका दे पाठ पढदा हैं किन्ने सफे पलट जानदा हैं" | (जब लोगों के लिए पाठ पढता है तो कितने पन्ने बिना पढे पलटता है) पाठी लोगों के लिए पाठ पढता था तो बीच में कई  पन्ने बिना पढे ही पलट जाता  था | फिर गुरुजी ने हमारी तरफ देखा और कहा "आपे पाठ किता करो" यानी पाठ अपने आप करना चाहिए किसी दुसरे के उपर निर्भर नही रहना चाहिए |

57. " - गुरुजी
लोग बेटा तो मांग लेते हैं, पर अगर वो मानसिक रूप से विक्षिप्त पैदा हो गया तो ?

58.  - गुरुजी
अगर आपको किसी ग़रीब या काम करने वालों को कुछ खाना देना है तो उत्सव शरू होने से पहले उनके लिए निकाल लें ना कि बाद का बचा जूठा उन्हें दें |

59. - गुरुजी
अगर कोई भिखारी आपसे कूछ मांगता है पर आप कुछ नही दे पा रहे तो, हाथ जोड़ लें,  ना जाने किस भेस में कौन आप के सामने खड़ा हो |

60.  - गुरुजी अपने घर में कोई भी मूर्तियाँ ना रखा करो जैसे घोड़ा, पक्षी, इंसान | इन्हे पानी में बहा दो यां पानी ना मिले तो ऐसे ही फैंक दो पर घर में मत रखो | घर को सजाना है तो फूलों से सजाओ |

61. गुरुजी एक बार एक दर्जी के पास अपने लिए पेंट सिलवाने गये तो दर्जी ने जेबों के लिए पूछा | गुरुजी ने हँस कर कहा "सानु बोज़या दी की लोढ़" यानी मुझे जेबों की क्या ज़रूरत है | गुरुजी पहले पेंट पहना करते थे पर बाद में उन्होने चोला पहनना शुरू कर दिया, किसी ने पूछा तो हँस कर कहा " ओय कोई गुरु मन्दा ही नही सी" यानी पेंट पहनने पर कोई गुरु मानता ही नही था |

62. " - गुरुजी
कभी भी किसी की निंदा मत करो ऐसा करने से आपका आशीर्वाद उसे हस्तांतरित हो जाता है और उसकी नकारात्मक कमाई आपकी झोली में आ जाती है |

63. " - गुरुजी
कभी दूसरों के दुःख मत सनो, जब भी कोई आप के सामने अपनी व्यथा कहने की कोशिश करे उनसे कहो, गुरुजी के पास जाओ, वही सब ठीक करेंगे | सुनो मत अन्यथा वे अपनी नकारात्मकता आप को दे कर आपका आशीर्वाद ले जायेंगे |

64.  - गुरुजी
दुसरे आपके बारे में क्या कहते हैं, इस बात से प्रभावित होने के स्थान पर अपने नियंत्रण मे रहना सीखो |

65. " - गुरुजी
प्रार्थना और पाठ हमेशा इतनी शांति से करना चाहिए की आप के आस-पास बैठे किसी को पता भी नही चले की आप पाठ कर रहे हो | इसी तरह दान भी गुप्त होना चाहिए की एक हाथ को पता ना चले दुसरे ने कुछ दिया है |

66. " - गुरुजी
घर में नागफनी तथा बोनसाई जैसे ना बढने वाले पौधे नहीं रखने चाहिए |

67. " - गुरुजी
अगर सेवा के पीछे कोई अप्रत्यक्ष स्वार्थ छुपा है, तो वो निस्वार्थ सेवा नही है, असल सेवा बिना किसी मांग तथा स्वार्थ के होती है |

68. "  - गुरुजी
अगर अपने दैनिक कामों को करने से किसी का भला हो जाता है तो क्या फर्क पड़ता है ?

69. " - गुरुजी
जो वास्तविक गुरु होते हैं वह हमेशा अपनी पहचान गुप्त रखते हैं, और जो आगे बढ बढ कर अपने बारे में खुद ही बताते हैं वह सच्चे गुरु नही होते |

70. "एक बार हम गुरुजी के साथ रात के 2 बजे तक बैठे थे और गुरदास मान जी का गाना "रातों को उठ उठ कर" चल रहा था और तब हम पता लगा की गुरुजी हमारे लिए कितनी प्रार्थना, कितना तप करते हैं ताकि हम रातों को शांति से सो सकें | गुरुजी कभी नही सोते थे, वे निरंतर पाठ करते रहते थे |

71.  - गुरुजी
गुरुजी के शरीर से निकलने वाली खुशबु, उनकी इच्छा के अनुसार निकलती थी | गुरुजी के अनुसार ये भी एक तरह का प्रशाद था जिसे पाने वाला उसे कही भी पा सकता था मंदिर में भी और घर बैठे भी |

72. गुरुजी ने एक बार कहा "की खाओगे? टमाटर विच वी स्प्रे है" गुरुजी
खाने पीने की वस्तओ के दूषित तथा संदूषण की वजह से परेशान रहते थे ।

73. गुरुजी = "गुर बानी दे टप्पे सुन्दे हो?" (गरु वाणी के शब्द सुनते हो?) मैने जवाब दिया "हांजी गुरुजी कदी कदी" (हाँ गुरुजी कभी कभी) गुरुजी = "समझ आन्दे ने ?" (समझ आते हैं?)  मैने कहा "जी थोड़े थोड़े" (जी थोड़े थोड़े) गुरुजी = "सुन्या करो, चन्गे होंदे ने" (सुना करो अच्छे होते हैं)

74. "- गुरुजी
जब भी मैं आप से  नृत्य करवाता हूँ तो आपके शरीर का पूरा खांचा (X_Ray)  मेरे सामने खीच जाता है और जहाँ भी कोई कमी या खराबी होती है मैं ठीक करता हूँ |

75. गुरुजी हमेशा संगत से "शिव पुराण" पढने के लिए कहते थे |

76. " - गुरुजी ज्यादा पैसा अच्छा नही होता, भगवान से हमेशा प्रार्थना करनी चाहिए की इतना दीजिये जितना मेरे परिवार के लिए पूरा हो |
77. " - गुरुजी
गुरु के सामने प्रार्थना कर के अपने कर्मों की माफी मांग लेनी चाहिए, उन कर्मों की भी जो आपको नही पता की आपने कुछ ग़लत कर दिए हैं |

78.  - गुरुजी
आपका अपने गुरु के लिए प्यार ऐसा होना चाहिए की सोते, जागते और अपने दैनिक कामों को करते हुए भी आप अपने गुरु को ही याद करते हों |

79. एक दिन मैंने गुरुजी से पूछा "मोक्ष मिलदा है"(क्या कभी मोक्ष मिलता है) गुरुजी ने जवाब दिया "जे चंगे कम करो ता" (हाँ मिलता है अगर अच्छे और मानवता के काम करो तो)

80. "मैं एक रसिक बैरागी हूँ जो तुम्हे पारिवारिक उत्तरदायित्व निर्वाह के साथ साथ प्रार्थना के मार्ग पर चलना सिखलाता है" - गुरुजी

81.  - गुरुजी
मैं सृष्टि के कामों में कभी हस्तक्षेप नही करता, लेकिन अगर कभी गुरु अपने किसी भक्त पर मेहरबान हो जाए तो सृष्टि का लिखा मिटा कर नया लेख भी लिख सकते हैं |

82. " - गुरुजी
गुरु जो बात कह देते हैं वो पत्थर की लकीर की तरह है, जो कहा है वो होना ही है |

83. " – गुरुजी
दुःख भरे गाने, सीरियल और फिल्म नही सुनने और देखनी चाहिए |

84. " - गुरुजी किसी इंसान का मंगलिक होना बेकार के वहम हैं |

85. "नॉन वेज नही खाओगे ते चन्गे रहोगे" - गुरुजी
शाकाहारी रहोगे तो सुखी रहोगे |

86. - गुरुजी
घर का बना खाना ही सबसे अच्छा होता है, बाहर ज्यादा नहीं खाना चाहिए |

87. " - गुरुजी
आत्महत्या करना महापाप होता है |

88. जब गुरुजी से किसी अन्य पवित्र धार्मिक स्थान के बारे में पूछा गया तो उन्होने कहा "अजमेर शरीफ सच्चा और पवित्र धार्मिक स्थल है" |

89. एक बार गुरुजी से किसी स्त्री गुरु के बारे में पूछा गया तो उन्होने कहा "औरत कदी गुरु नही हो सकदी" (औरत कभी भी गुरु नही बन सकती)

90. "- गुरुजी
जब भी आप कोई हीरे की वस्तु पहनने का मन बनाते हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला हीरा ही पहनना चाहिए, क्योंकि उसका पहनने वाले पर असर होता है |

91. " - गुरुजी
मैं किसी राजनैतिक पार्टी से सम्बंधित नही हूँ |

92 -  गुरुजी का आदेश था की चढाए हए फूल नही लेने चाहिए, और अगर मिल जाए तो घर जाते हए नदी में बहा देने चाहिए |

93.  - गुरुजी
सलवार कमीज़ सबसे अच्छी पोशाक होती है, साड़ी से भी अच्छी |

94. - गुरुजी
सब के पास अपना पूरा घर होता है, पर रहने के लिए सिर्फ एक कमरे की ही आवश्यकता होती है |

95. ताम्बे के लोटे के बारे में गुरुजी ने कहा ये अपनी कमाई से खरीदना चाहिए ।

96. " - गुरुजी
सिर्फ मेरी फोटो से ताम्बे का लोटा छुआ देने से वो अभिमंत्रित हो जाता है | ताम्बे के लोटे को कभी साबुन इत्यादि से नही साफ करना चाहिए | रोज़ रात को नींबू या राख से धो कर पानी से भर कर रख देना चाहिए और सुबह सबसे पहले वही पानी पीना चाहिए |

97.  - गुरुजी
बच्चों पर पढाई का बहत ज़्यादा भार नही डालना चाहिए, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार ही पढने देना चाहिए | 

98. - गुरुजी
ये कलयुग है, इस युग में भगवान बहत शीघ्र और आसानी से मिल जाते हैं | उन्हे पाने के लिए कठिन तप करने यां पेड़ से उल्टे लटकने की ज़रूरत नही है | बस प्रार्थना करो और भगवान का शुकराना करो |

99. गुरुजी को "फेंग शुई" पर कभी विशवास नही था |

100. गुरुजी के शरीर से एक खुशबु निकलती थी | उन्होने बताया की ये बरसों के तप से होता है.... अपने अन्दर का एक ऐसा स्वर्ग जिसे "सचखण्ड" भी कहा जाता है |

101. गुरुजी की नज़र में कोई नई संगत या पुरानी संगत जैसा कुछ नही था, सब एक बराबर थे | उनका कहना था की मेरे साथ कितने वर्ष का साथ है कभी मत गिनो क्योंकि सिर्फ उन्हे पता है की हम उनके साथ कितने जन्मों से जुड़े हुए हैं | गुरुजी भूत, वर्तमान और भविष्य, सब देख सकते थे और उनसे कछ भी नही छुपा हआ था | गुरुजी किसी को भी ये बता देते थे की कब उसने क्या खाया सिर्फ ये बताने के लिए की वो सब जानते हैं |

102. "मेरे नाल डायरेक्ट कनेक्शन जोड़ो" - गुरुजी
सीधा मेरे साथ संपर्क रखो ।

103. मैं पहले उन्हें आशीर्वाद देता हूँ जो तुम्हे मेरे पास लाता है, और उसके बाद की यात्रा तुम्हारी अपनी है |

104.  " - गुरुजी
अगर किसी अच्छी चीज़ या काम के साथ कुछ बुरा जुड़ा होता है तो उसे भी अच्छे की तरह ही स्वीकार करो क्योंकि संपूर्ण दोषरहित कुछ नही होता, जैसे गुलाब के साथ कांटे भी होते हैं |

105. गुरु अपना आशीर्वाद देने के बाद कभी वापिस नही लेते | गुरु के काम करने के तरीके आश्चर्यजनक होते हैं | हमें उनके आशीर्वाद को भौतिक वस्तुओं और नफे नुक्सान से नही मापना चाहिए ।

जय गुरुजी महाराज