DAUGHTER GREAT GIFT OF GOD

एक गर्भवती स्त्री ने अपने पति से कहा, "आप क्या आशा करते हैं लडका होगा या लडकी"
पति-"अगर हमारा लड़का होता है, तो मैं उसे गणित पढाऊगा, हम खेलने जाएंगे, मैं उसे मछली पकडना सिखाऊगा।"
पत्नी - "अगर लड़की हुई तो...?"
पति- "अगर हमारी लड़की होगी तो, मुझे उसे कुछ सिखाने की जरूरत ही नही होगी"
"क्योंकि, उन सभी में से एक होगी जो सब कुछ मुझे दोबारा सिखाएगी, कैसे पहनना, कैसे खाना, क्या कहना या नही कहना।"
"एक तरह से वो, मेरी दूसरी मां होगी। वो मुझे अपना हीरो समझेगी, चाहे मैं उसके लिए कुछ खास करू या ना करू।"
"जब भी मै उसे किसी चीज़ के लिए मना करूंगा तो मुझे समझेगी। वो हमेशा अपने पति की मुझ से तुलना करेगी।"
"यह मायने नही रखता कि वह कितने भी साल की हो पर वो हमेशा चाहेगी की मै उसे अपनी baby doll की तरह प्यार करूं।"
"वो मेरे लिए संसार से लडेगी, जब कोई मुझे दुःख देगा वो उसे कभी माफ नहीं करेगी।"
पत्नी - "कहने का मतलब है कि, आपकी बेटी जो सब करेगी वो आपका बेटा नहीं कर पाएगा।"
पति- "नहीं, नहीं क्या पता मेरा बेटा भी ऐसा ही करेगा, पर वो सिखेगा।"
"परंतु बेटी, इन गुणों के साथ पैदा होगी। किसी बेटी का पिता होना हर व्यक्ति के लिए गर्व की बात है।"
पत्नी -  "पर वो हमेशा हमारे साथ नही रहेगी...?"
पति- "हां, पर हम हमेशा उसके दिल में रहेंगे।"
"इससे कोई फर्क नही पडेगा चाहे वो कही भी जाए, बेटियाँ परी होती हैं"
"जो सदा बिना शर्त के प्यार और देखभाल के लिए जन्म लेती है।"

" बेटियां सब के मुकद्दर में, कहाँ होती हैं
जो घर खुदा को पसंद हो, वहां होती हैं"

ALWAYS PRAY TO GOD

एक कबूतर-कबूतरनी का जोड़ा आकाश में विचरण कर रहा था।
तभी उनके ऊपर एक बाज उनको खाने के लिए उनके ऊपर उड़ने लगा।
वह दोनों जैसे-तैसे और भी तेजी से उड़ने लगे।

तभी जमीन पर एक शिकारी भी उनको मारने के लिए तीर-कमान लेकर आ गया।

उस समय कबूतर भगवत नाम का स्मरण कर रहा था।
और इसीलिए उसे जरा सा भी भय नहीं था।

पर कबूतरनी को डर लग रहा था।
वह सोच रही थी कि मेरा पति तो सत्गुरु का जप कर रहा है और इसे तो कोई डर नहीं है,
पर आज हमारी दोनों और से मृत्यु निश्चित है।
या तो हमें ये बाज मार डालेगा और या वो नीचे जो शिकारी है वो मार देगा।
अब हमारा क्या होगा हम तो मरने वाले हैं।

तभी सत्गुरू की कृपा से वहां जमीन पर एक सांप आ जाता है।
और वो सांप वहां खड़े शिकारी को डस लेता है।
और शिकारी ने तीर का निशाना,
जो उस कबूतर-कबूतरनी को मारने के लिए लगा रखा था,
वो हड़बड़ाहट में जाकर के सीधा उस बाज के लग जाता है।
और कबूतर-कबूतरनी के पास दोनों तरफ से आई हुई मृत्यु टल जाती है।

------ तात्पर्य ------
इससे हमें ये शिक्षा मिलती है,
कि चाहे कितनी भी विपत्ति क्यों ना आ जाए,
सत्गुरू का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए।
सत्गुरू हमें सारी विपत्तियों से निकाल लेते हैं।
बस उनका ही एक आसरा होना चाहिए।

A LETTER TO FATHER

पुत्र अमेरिका में जॉब करता है।
उसके माँ बाप गाँव में रहते हैं।
बुजुर्ग हैं, बीमार हैं, लाचार हैं।
पुत्र कुछ सहायता करने की बजाय पिता जी को एक पत्र लिखता है। कृपया ध्यान से पढ़ें और विचार करें कि किसको क्या लिखना चाहिए था ?

                       पुत्र का पत्र पिता के नाम

पूज्य पिताजी!

आपके आशीर्वाद से आपकी भावनाओं इच्छाओं के अनुरूप मैं, अमेरिका में व्यस्त हूं।
यहाँ पैसा, बंगला, साधन सब हैं,
नहीं है तो केवलसमय।

मैं आपसे मिलना चाहता हूं,
आपके पास बैठकर बातें करना चाहता हूँ।
आपके दुख दर्द को बांटना चाहता हूँ,
परन्तु क्षेत्र की दूरी,
बच्चों के अध्ययन की मजबूरी,
कार्यालय का काम करना जरूरी,
क्या करूँ? कैसे कहूँ?
चाह कर भी स्वर्ग जैसी जन्म भूमि
और माँ बाप के पास आ नहीं सकता।

पिताजी।!
मेरे पास अनेक सन्देश आते हैं
"माता-पिता सब कुछ बेचकर भी बच्चों को पढ़ाते हैं,
और बच्चे सबको छोड़ परदेस चले जाते हैं,
पुत्र, माता-पिता के किसी काम नहीं आते हैं। "

पर पिताजी,
मैं कहाँ जानता था इंजीनियरिंग क्या होती है?
मैं कहाँ जानता था कि पैसे की कीमत क्या होती है?
मुझे कहाँ पता था कि अमेरिका कहाँ है ?
मेरा कॉलेज, पैसा और अमेरिका तो बस,
आपकी गोद ही थी न?

आपने ही मंदिर न भेजकर स्कूल भेजा,
पाठशाला नहीं कोचिंग भेजा,
आपने अपने मन में दबी इच्छाओं को पूरा करने इंजीनियरिंग /पैसा /पद की कीमत,
गोद में बिठा बिठाकर सिखाई।

माँ ने भी दूध पिलाते हुये ,
मेरा राजा बेटा बड़ा आदमी बनेगा ,
गाड़ी बंगला होगा हवा में उड़ेगा ,कहा था।
मेरी लौकिक उन्नति के लिए,
घी के दीपक जलाये थे।।

मेरे पूज्य पिताजी!
मैं बस आपसे इतना पूछना चाहता हूं कि,
मैं आपकी सेवा नहीं कर पा रहा,
मैं बीमारी में दवा देने नहीं आ पा रहा,
मैं चाहकर भी पुत्र धर्म नहीं निभा पा रहा,
मैं हजारों किलोमीटर दूर बंगले में और आप,गाँव के उसी पुराने मकान में ,
क्या इसका सारा दोष सिर्फ़ मेरा है?

आपका पुत्र,
 
अब यह फैंसला हर माँ बाप को करना है कि अपना पेट काट काट कर, दुनिया की हर तकलीफ सह कर, अपना सबकुछ बेचकर,बच्चों के सुंदर भविष्य के सपने क्या इसी दिन के लिये देखते हैं?
क्या वास्तव में हम कोई गलती तो नहीं कर रहे हैं.....?

PRESENCE OF GOD EVERYWHERE

ईश्वर कण-कण में है,अंग संग है ,पत्ते पत्ते में ,जर्रे-जर्रे में है,जब यह हर जगह व्याप्त हैं ,हमारे हर करम यह देख रहा है हमें हर अच्छे और बुरे कर्म का फल भी दे रहा है फिर क्या जरुरत पड़ी है कि हम इसे जाने यदि इसे नहीं भी जानते हैं तो भी तो हमारे अंग संग ही है? संत जी ने एक कहानी का सहारा लेकर इस बात को समझाया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति पसीने से तरबतर बहुत परेशान था,धूप में चला जा रहा है ,उसके हाथों में एक साइकिल है लेकिन फिर भी वो उस पर बैठ नहीं रहा है! राह चलते किसी सज्जन ने उससे पूछा ,भाई साहब आपके पास साइकिल है फिर भी आप पैदल क्यों जा रहे हैं? उन्होंने कहा साइकिल तो मेरे पास है परंतु इसके टायर में हवा नहीं है।वह व्यक्ति मुस्कुराया और कहां हवा तो हमारे चारों तरफ भरपूर है फिर भी आप के टायर में हवा क्यों नहीं? बिना हवा के तो हम एक पल सांस भी नहीं ले सकते यदि एक पल भी हवा ना मिले तो हमारी जान निकल जाए।
वह व्यक्ति उन्हें पास के एक साइकिल दुकान में ले गया और पाइप लेकर हवा भर दिया। जिस पाइप से वह हवा भर रहा था उस पाइप में कोई मशीन नहीं लगी थी ,वह आसपास की उपलब्ध हवा की द्वारा ही  पहिए में हवा भर दिया  ।
पाइप ने एक माध्यम का काम किया ,उसने हवा को बनाई नहीं बल्कि वहीं उपलब्ध हवा के द्वारा उसने साइकिल के पहिए में हवा भर दी।हवा भर जाने के बाद वह व्यक्ति बड़े आराम से साइकिल पर बैठकर अपने गंतव्य की ओर सुगमता से चला गया।
संतजी ने समझाया, इस कहानी में बहुत ही सरल तरीके से बात समझा  दी गई कि जिस प्रकार हवा भरने वाली पाइप ने हवा को बनाया नहीं बल्कि आसपास की हवा को ही उस साइकिल के पहिए में भर दिया ।हवा भरने के पाइप ने सिर्फ एक माध्यम का काम किया और उस व्यक्ति की समस्या का समाधान हो गया।
इसी प्रकार गुरुजी तो अंग  संग है लेकिन जब तक गुरुजी की कृपा नहीं होती ,किसी जानने वाले के द्वारा इसकी जानकारी नहीं दी जाती तब तक इसे  देख नहीं पाते, इसका एहसास नहीं कर पाते, यह निरंकार दातार हर पल पास तो होता है लेकिन इसका हम किसी प्रकार उपयोग नहीं कर पाते ,इस से नाता जोड़ नही पाते ,इसको महसूस नहीं कर पाते।
गुरुजी की कृपा होती है इसे अंग संग  दिखला दिया जाता है इसके बाद ही इस का आसरा लेकर जीवन को आनंदित और सुहेला करते हैं। इसकी जानकारी ‌के पश्चात ही इसके साथ नाता जुड़ता है, इसके साथ प्रेम होता है। इसका एहसास हर पल हमें आनंदित रखता है।

INDIAN RICH CULTURE

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