एक कबूतर-कबूतरनी का जोड़ा आकाश में विचरण कर रहा था।
तभी उनके ऊपर एक बाज उनको खाने के लिए उनके ऊपर उड़ने लगा।
वह दोनों जैसे-तैसे और भी तेजी से उड़ने लगे।
तभी जमीन पर एक शिकारी भी उनको मारने के लिए तीर-कमान लेकर आ गया।
उस समय कबूतर भगवत नाम का स्मरण कर रहा था।
और इसीलिए उसे जरा सा भी भय नहीं था।
पर कबूतरनी को डर लग रहा था।
वह सोच रही थी कि मेरा पति तो सत्गुरु का जप कर रहा है और इसे तो कोई डर नहीं है,
पर आज हमारी दोनों और से मृत्यु निश्चित है।
या तो हमें ये बाज मार डालेगा और या वो नीचे जो शिकारी है वो मार देगा।
अब हमारा क्या होगा हम तो मरने वाले हैं।
तभी सत्गुरू की कृपा से वहां जमीन पर एक सांप आ जाता है।
और वो सांप वहां खड़े शिकारी को डस लेता है।
और शिकारी ने तीर का निशाना,
जो उस कबूतर-कबूतरनी को मारने के लिए लगा रखा था,
वो हड़बड़ाहट में जाकर के सीधा उस बाज के लग जाता है।
और कबूतर-कबूतरनी के पास दोनों तरफ से आई हुई मृत्यु टल जाती है।
------ तात्पर्य ------
इससे हमें ये शिक्षा मिलती है,
कि चाहे कितनी भी विपत्ति क्यों ना आ जाए,
सत्गुरू का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए।
सत्गुरू हमें सारी विपत्तियों से निकाल लेते हैं।
बस उनका ही एक आसरा होना चाहिए।
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JAI GURUJI
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