जन्मदिन का अवसर

जीवन में हमें अपने बड़ों का आशीर्वाद मिले मेरे लिए एक वरदान है































A letter to God about lockdown experience






Respected God 
I want to share my ture feelings and real experience of very strange and unexpected behaviour of people living all around us, my wife became very irritated and changed her behaviour, she tried to stay away from me but home has a boundary wall, we stayed together but became unaware aout ourselves. my son got orders to work from home, he always demanded tea and food again and again, one of neighborhood got corona in the month of Jun, all family members stayed quarantine for more than one month to avoid any happening , o God all became very strange with them, people who lived near by did not talk and igonored them, my lord , all were scattered due to lack of emotional and spiritual strength.
oh! god! I wish to get time to talk to my friends and relatives heartily but nothing will happen for many months even over of corona.
I m amazed to people living conditions and situation which are hardest and undesirable for any one in this world.

सिमरन की महिमा










*🧘🏻‍♂सिमरन क्या है?🧘🏻‍♀*
*सिमरन अर्थ स्मरण जो हाथ पैरों से नहीं होता है, वर्ना दिव्यांग कभी नहीं कर पाते...*
*सिमरन ना ही आँखो से होता है, वर्ना सूरदास जी कभी नहीं कर पाते...*
*ना ही सिमरन बोलने से, सुनने से होता है वर्ना गूँगे बैहरे कभी नहीं कर पाते...*
*ना ही सिमरन धन और ताकत से होता है, वर्ना गरीब और कमजोर कभी नहीं कर पाते...*
👉 *सिमरन केवल भाव से होता है, एक अहसास है सिमरन... जो हृदय में प्रस्फुटित होता है...*
*जो हृदय से होकर विचारों में आता है और हमारी आत्मा से जुड़ जाता है। हमारे आत्मा से संसार तक सुगंध फैलाता है... स्मरण भगवान से हम तक सिधा संबंध बनाता है...*
*सिमरन भाव का सच्चा सागर है... बस इस सागर में हमें डुबकी लगाना है... 💞(कार्तिक महात्म्य)... राधे राधे*🙏🚩

गुरुजी की सीख

एक बच्चा रोज अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था
बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की इच्छा रखता था, किन्तु दादा जी की उपस्थिति उसे अवसर  ही नही देती थी

एक दिन दादा जी को शाम को आने में विलंब हुआ, इस अवसर का लाभ लेते हुए बच्चे ने समय पर पूजा प्रारम्भ कर दी

जब दादा जी आये, तो दीवार के पीछे से बच्चे की पूजा देख रहे थे

बच्चा बहुत सारी अगरबत्ती एवं अन्य सभी सामग्री का अनुष्ठान में यथाविधि प्रयोग करता है और फिर अपनी प्रार्थना में कहता है..

भगवान जी प्रणाम...... 

आप मेरे दादा जी को स्वस्थ रखना और दादी के घुटनों के दर्द को ठीक कर देना, क्योकिं दादा-दादी को कुछ हो गया, तो मुझे चॉकलेट कौन देगा

फिर आगे कहता है... भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना, वरना मेरे साथ कौन खेलेगा

फिर मेरे पापा और मम्मी को ठीक रखना, घर के कुत्ते को भी ठीक रखना, क्योकिं उसे कुछ हो गया, तो घर को चोरों से कौन बचाएगा

लेकिन भगवान यदि आप बुरा न मानो तो एक बात कहूँ, सबका ध्यान रखना,लेकिन उससे पहले आप अपना ध्यान रखना,क्योकि आपको कुछ हो गया,तो हम सबका क्या होगा

इस सहज प्रार्थना को सुनकर दादा की आंखों में भी आंसू आ गए, क्योकिं ऐसी प्रार्थना उन्होंने न कभी की थी और ना ही सुनी थी

सदैव प्रसन्न रहिये

सतत जीवन चाहिए तो सरल बनो

यदि व्यक्ति को अपना जीवन सतत यानी कि निरंतर प्रगतिशील और उन्नति मान बनाना है तो उसे सरल बने रहना पड़ेगा जैसे गांव का साधारण किसान जिस मस्ती और जिस भावना से अपना जीवन बिता पर है उसके मन में कोई विस्तरण आया लालसा नहीं होती जिसके कारण वह अपने जीवन को निश्चल और शांत भाव से बिताता है जबकि भौतिक वस्तुओं से गिरा इंसान अपने आप को इच्छाओं के जाल में इस प्रकार समेट लेता है कि उसकी जीवन सरल ना रहकर विकट और दुष्कर् जाता है अपने आप को सरल बनाए रखने के लिए ठीक हूं सरल भाव का होना भी जरूरी है यदि उसकी भावना सरल और सुगम है तो उसकी सोच और उसकी मानसिक अवस्था भी संतोष वाली रहेगी और उसको किसी चीज का नुकसान या फायदा नहीं होगा क्योंकि वह उन परिस्थितियों में भी अपने आप को सरल बनए रखता है जिस प्रकार की शान फसल बोने के बाद अपनी उम्मीद है भगवान के ऊपर छोड़ देता है जिसके कारण हो सरल रहता है और उसको देव इच्छा के द्वारा वही प्राप्त होते हैं जो उसके निष्काम फल का प्रतीक होता हैयदि आप इस लेख से सहमत हैं या असहमत हैं तो कृपया अपने कमेंट जरूर करें ताकि आने वाले लेखों में उसका ध्यान रखा जा सके