GURUJI ki Mahima

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*गुरु क्या है..*

१) गुरु हर सवाल का जवाब है
२) गुरु हर मुश्किल की युक्ति है
३) गुरु ज्ञान का भंडार है
४) गुरु मार्गदर्शक है
5) गुरु एक अहसास है
६) गुर प्यार है
७) गुरु ज्ञान की वाणी है
८) गुरु हमारे जीवन का चमत्कार है
९) गुरु मित्र है
१०) गुरु भगवान् रूप है
११) गुरु अध्यात्म की परिभाषा है

धन्य हे वो लोग जो गुरु के संपर्क मे है तथा उनके सानिध्य में जीवन के कुछ ज्ञान और शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिला।
गुरु शब्द और गुरु का जीवन समुंदर की गहराई है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता है।
 
*सब धरती कागज करूँ लिखनी सब वनराय*
*सात सुमुंदर को मसि करूँ गुरु गुण लिखा ना जाये*

*गुरु की महत्ता*

करता  करे ना कर सके , गुरु करे सब होय |
*सात द्वीप नौ खंड में गुरु से बड़ा ना कोय ||*
मैं तो सात संमुद्र की मसीह करु , लेखनी सब बदराय |
*सब धरती कागज करु पर , गुरु गुण लिखा ना जाय ।।*

गुरु का हाथ पकड़ने की बजाय अपना हाथ गुरु को पकड़ा दो
क्योंकि हम गुरु का हाथ गलती से छोड़ सकते हैं,  किन्तु........
गुरु हाथ पकड़ेंगे तो कभी नहीं छोड़ेंगे 

गुरु ही ब्रम्हा  गुरु ही विष्णु  गुरु देवो महेश्वरः ।।
*गुरु ही साक्षात परब्रह्म  तस्मै श्री गुरुवै नमः ।।*

गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है , गुरु ही हमें सही राह दिखाते है ।
इसलिए हमें गुरु की हर आज्ञा का पालन करना चाहिए ।।
प्रभु श्रीराम एवं श्री कृष्ण को भी गुरु के पास शिक्षा प्राप्त करना पड़ा था ।।
गुरु भक्ति के कई उदाहरण हमारे ग्रंथों में हैं ।।

            गुरु केवल मार्गदर्शक है।
आत्मा के लिये तो आपको ही पुरुषार्थ करना है।
गुरु ने रास्ता दिखाया है,
चलना आपको है।
गुरु ने उपदेश दीया है,
पालन आपको करना है।
गुरु की वाह वाह से मोक्ष नहीं मिलता है।
गुरुवचन के अनुसार चलने से मोक्ष मिलता है

जब गुरु के दर जाना हो,
तो दिमाग बंद कर लेना.....

जब गुरु के शबद सुनने हों,
तो कान खोल लेना....
जब गुरु पे विश्वास करना हो,
तो आँखें बंद कर लेना....

जब गुरु को अर्पण करना हो,
तो दिल खोल लेना......
जब गुरु का प्रवचन सुनना हो,
तो मुख बंद कर लेना......

जब गुरु की सेवा करनी हो,
तो घड़ी बंद कर लेना.....
जब गुरु से विनती करनी हो,
तो झोली खोल लेना..... !!!!!!

*यह गुरु का दर है भाई यहाँ मनमानी नही होती,*
*यह बातभी पक्की है कि कोई परेशानी नही होती,*