MEDITATION

मानसिक विस्तार के लिए साधना
अपनी सुविधानुसार किसी भी आसन मैं बैठ जाइए। अपने मन तथा इंद्रियों को वैचारिक जगत से हटाकर अंतर्मुखी कीजिए। ॐ का मानसिक जाप करें। अपने मन में परमात्मा के प्रति प्रगाढ़ भक्ति भाव उत्पन्न होने दीजिए। ओम के प्रत्येक मानसिक जप को ईश्वर की ओर व्यग्रता पूर्वक बढ़ रहे कदम की तरह होना चाहिए।
ॐ के प्रत्येक जप को परमेश्वर के स्पर्श करने की प्रक्रिया बनने दीजिए।
आप कल्पना कीजिए कि एक विशाल और दिव्य पर्वतमाला धीरे-धीरे विकसित हो रही है। चोटियां सुंदर, श्वेत हिमाच्छादित है। अनुभव कीजिए कि आप पर्वतमाला के शिखर पर धीरे-धीरे टहल रहे हैं। अपने प्रत्येक कदम के साथ आप भावपूर्वक ॐ का जप तो करते ही हैं साथ ही उच्च शिखर पर चढ़ने के क्रम में प्रकृति के विस्तार को अधिकाधिक अवलोकन करते हुए समस्त परिवेश की अदभुत सुंदरता का आनंद भी ले रहे हैं।

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