दी गई तस्वीरें अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर की है जिस की शोभा देखने लायक बनती है इस मंदिर को देखकर आपको बहुत शांति का एहसास होगा बेहद शांत और सुंदर जगह बना हुआ है यह मंदिर इस मंदिर में जाने पर आपको बहुत सारी विशेष बातें देखने को मिलेंगी जो किसी भी अन्य जगह देखने पर नहीं मिल सकती केवल सिख धर्म ही एक ऐसा धर्म है जहां पर आपको नंबर मिल सकता है और सुबह शाम आप लंगर ले सकते हैं जबकि ऐसा किसी अन्य स्थान पर देखने को नहीं मिलता है सिख धर्म में अपने धर्म के प्रति जो आदर देखने को मिलता है उसकी सराहना जितनी की जाए कम है क्योंकि यह अपने धर्म में इतनी आस्था रखते हैं और इतना सद्भाव और प्यार दिखाते हैं कि जो बहुत ही शोभनीय है और बहुत ही दिल को लुभाने वाला है आपको यह किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी अगर आप कुछ दिन ठहरना चाहते तो आप को रहने का स्थान भी उपलब्ध हो सकता है
Millions of millions years have passed and human civilization comes into existence. Existence of God is eternal truth
Golden temple
I am Raj Kumar Gupta from Delhi India, I always like to share my personal views of life and experiences . I like to meet with new people and visit historical places, religious places.. please send me your comments and suggestions to improve my blogs. Follow my blogs and inspire me.
GAINING OF PEACE
प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे जीवन मेंं सफलता मिले। मनचाहे लक्ष्य प्राप्त हो । बच्चे सफल कैसे हो । पति श्रेष्ट कैसे बने । रोग कैसे ठीक हो । योग मेंं सिद्वि कैसे प्राप्त करे । लोगो से स्नेह कैसे हो । लड़ाई झगड़े कैसे खत्म हो । काम धंधे मेंं बढ़ोतरी कैसे हो। आपसी क्लेश कैसे खत्म हो। प्राय प्रत्येक व्यक्ति यही प्रशन करता है । कोई भी काम करते है, करना चाहते हैं, चाहे वह भोजन बनाना हो, सकूल जाना हो, काम पर जाना हो, ज्ञान सुनना सुनाना हो, पहले अपने विचार, अपनी मनो भावना को चेक कपने विचारो को प्यार मेंं बदलो । सभी चीजो, सभी आदतों, सभी कार्यो, सभी व्यक्तियों, सभी साधनों के बारे सोचे, जिसे आप प्यार करते हैं या करते थेसब से उतम यह हैं कि भगवान के बिंदु रूप या इष्ट को देखते हुए भगवान के गुण सिमरन करो आप प्यार के सागर है।प्यार के सागर-अगर मन मेंं प्यार की लहर नहीं उठ रही है तो कोई प्यारा सा गीत या भजन आदि सुनो और सुनते रहो और भगवान को याद करते रहो । आप कोई काम भी कर सकते है परन्तु मधुर संगीत सुनते हुए कर-अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते । तब एक एक कर के घर, बाग-बगीचे,मित्र,फूल, मौसम, रंग, स्थितिया, घटनाए सप्ताह, महीने, वर्ष मेंं जु़ी हुई मनचाही प्रिय घटनाए, प्रिय चीजे, प्रिय व्यक्ति/व्यक्तियों को याद करो और बीच मेंं भगवान को याद करते रहो, देखते रहो । हो सके तो वह चीजे,व्यक्ति या और कुछ बहुत प्रिय हैं, उनकी लिस्ट बना अच्छी भावनाओ और अच्छे विचारो को बढ़ाने का यह सहज तरीका हैं । इसे आप कहीं भी, कभी भी कर सकते है।आप स्वास्थ्य, धन, संबंध, स्वास्थ्, नौकरी और संबंधो के बारे जो महसूस करते हैं, आप के जीवन मेंं वही घट रहा हैं। तथा आगे बढ़ कर मिलने वाला-इस समय जब आप यह लेख पढ़ रहे हैं चैक करो मै क्या सोच रहा हूं। अगर नकारात्मक सोच रहे हैं तो इस का विपरीत अच्छा क्या हैं सिर्फ वह सोचो । यह संशय न आने दो कि पता नहों, होगा कि नहीं।आप को सिर्फ अच्छा अच्छा सोचना हैं । जो चाहते हैं वह सोचना हैं । जो इस समय विपरीत घट रहा हैं उस पर नहीं सोच-आप अपने स्वास्थ्य के बारे नौकरी के बारे,परिवार के बारे या अन्य महत्वपूर्ण विषयो के बारे क्या सोच रहे है।इस सोच पर ध्यान रखना सिर्फ और सिर्फ अपनी मनोदशा, अपनी मनोस्थिति पर ध्यान रखनाआप की भावना और आप के आस पास के संसार का आपस मेंं अटूट संबंध परमात्मा का दिव्य बल अपनी तरफ से कुछ नहीं कयह तो आप की भावनाओ पर प्रतिक्रिया करता एक का लाख गुना अच्छा फल देता ह-एक का लाख गुना बुरा फल भी देता हैं प्रत्येक संकल्प हमें बताता सोचते ही अगर बुरा महसूस होता है तो यह परमात्मा अपने दिव्य बल से इशारा देता है कि यह ठीक नहीं, इसे मत करो इसका फल बुरा-इसलिए हमारे जीवन मेंं जो विपरीत हो रहा है, उसे अच्छे विचारो मेंं बदलो ।
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IMPACT OF BLESSINGS
प्रणाम का महत्व
महाभारत का युद्ध चल रहा था ।एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि "मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा"उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई ।
भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता थाइसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|
तब श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो
श्री कृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो ।द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने "अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया,फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!
"वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्री कृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?तब द्रोपदी ने कहा कि "हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया ।भीष्म ने कहा "मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्री कृष्ण ही कर सकते है"शिविर से वापस लौटते समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि "तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है "
" अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती "
वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि "जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "
" यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो "
बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई "अस्त्र-शस्त्र" नहीं भेद सकता
प्रणाम प्रेम है।
प्रणाम अनुशासन है।
प्रणाम शीतलता है।
प्रणाम आदर सिखाता है।
प्रणाम से सुविचार आते है।
प्रणाम झुकना सिखाता है।
प्रणाम क्रोध मिटाता है।
प्रणाम आँसू धो देता है।
प्रणाम अहंकार मिटाता है।
प्रणाम हमारी संस्कृति है।
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VICTORY OF WOMANHOOD
एक आदमी ने महिला से पूछा- तेरी जाति क्या है?
महिला ने पूछा : एक मां की या एक महिला की ..?
उसने कहा - चल दोनों की बता .. और मुस्कान बिखेरी महिला ने भी पूरे धैर्य से बताया.......एक महिला जब माँ बनती है तो वो जाति विहीन हो जाती है..
उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा - वो कैसे..?
जबाब मिला कि .....जब एक मां अपने बच्चे का लालन पालन करती है, अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है ,
तो वो शूद्र हो जाती है..वो ही बच्चा बड़ा होता है तो मां बाहरी नकारात्मक ताकतों से उसकी रक्षा करती है, तो वो क्षत्रिय हो जाती है..जब बच्चा और बड़ा होता है, तो मां उसे शिक्षित करती है, तब वो ब्राह्मण हो जाती है..
और अंत में जब बच्चा और बड़ा होता है तो मां
उसके आय और व्यय में उसका उचित मार्गदर्शन कर
अपना वैश्य धर्म निभाती है ..तो हुई ना एक महिला या मां जाति विहीन..उत्तर सुनकर वो अवाक् रह गया । उसकी आँखों में महिलाओं या माँओं के लिए सम्मान व आदर का भाव था और महिला को अपने मां और महिला होने पर पर गर्व का अनुभव हो रहा था।
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LORD KRISHNA CHILDHOOD
लड्डू गोपाल, जिनका नाम ही उनके भक्तों के मुख मण्डल को प्रसन्नता से आलोकित कर देता है । एक ऐसा प्यारा सा नन्हा सा बालक जिसके एक हाथ में सदा लड्डू विराजमान रहता है, लड्डू के बिना जो एक पग भी आगे नहीं बढ़ता। जिसकी मोटी-मोटी गोल-गोल प्यारी-प्यारी आँखे सदैव लड्डू पर ही लगी रहती है, जिसका सर्वाधिक प्रिय भोग लड्डू है । लड्डू को देखते ही जिसकी आँखों में लालच दिखाई देने लगता है जीभ ओठों पर आ जाती है, लड्डू के लालच में जो कुछ भी करने को तैयार हो उनका नाम है लड्डू गोपाल । जन्म-जन्म के भूखे हैं लड्डू के लड्डू गोपाल जी, इनकी लड्डू की भूख कभी समाप्त ही नही होती । लड्डू के नाम पर कोई भी भक्त इनको कभी भी कही भी बुला सकता है, दौड़े चले आते हैं लड्डू गोपाल जी ।
किन्तु क्या लड्डू खाना और लड्डू के लिए मचलना यही लड्डू गोपाल जी का कार्य है। नही, कतापि नहीं, लड्डू गोपाल जी की महिमा अपरम्पार है। इनकी लीला और महिमा की कोई थाह नही, लड्डू गोपाल जी के चमत्कार निराले हैं । वर्तमान समय में घर-घर में लड्डू गोपाल जी विराजमान रहते है। लड्डू गोपाल जी की सेवा करना, उनसे प्रेम करना कृष्ण प्रेमियों का सबसे प्रिय कार्य है। जिस भी घर में लड्डू गोपाल जी विराजमान होते हैं उस घर परिवार के सभी लोग लड्डू गोपाल जी से बहुत प्रेम करते है और पूरे मनोयोग से उनकी सेवा करते हैं। लड्डू गोपाल जी की सेवा में जो सुख प्राप्त होता है वह उनके भक्त ही जान सकते है, ऐसा सुख मानो सुख के सागर में ही खड़े हो, एक ऐसा आलोकिक सुख जो अन्यन्त्र कही भी प्राप्त नही हो सकता।
लड्डू गोपाल जी के सभी भक्त यह भली प्रकार जानते हैं कि लड्डू गोपाल जी मात्र एक प्रतीमा ही नही हैं वह एक जीवित शक्ति है। यूं तो प्रत्येक घर में अनेक देवी-देवताओं की मूर्ती फोटो आदि होती हैं, किन्तु लड्डू गोपाल जी की प्रतीमा में थोड़ी सी सेवा और प्रेम भाव से शीघ्र ही प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है, तब लड्डू गोपाल जी घर के एक सदस्य के रूप में सदा साथ रहते है।
लड्डू गोपाल की सेवा तो अनेक घरों में कि जाती है किन्तु लड्डू गोपल जी के चमत्कार किसी-किसी को ही देखने को मिलते हैं। जिनको लड्डू गोपाल जी एक बार अपना चमत्कार दिखा दें उसका जीवन पूर्ण रूप से परिवर्तित हो जाता है। फिर लड्डू गोपाल जी उसका साथ जीवन भर नहीं छोड़ते। लड्डू गोपाल जी एक बार जिस पर रीझ जाते हैं फिर एक पल भी उसका साथ नहीं छोड़ते। कहने वाले कुछ भी कहें लेकिन यह परम सत्य है कि एक बार लड्डू गोपाल जी का मन आप पर आ गया तो फिर वह आपका दामन कभी नहीं छोड़ने वाले। वह हर पल आपके साथ ही रहेंगे।
आप विश्वाश करें या न करे किन्तु वह एक जीवित सदस्य के समान ही आपके साथ व्यव्हार करेंगे। आपके साथ आपकी थाली में आपके हाथों से भोजन करेंगे, आपके साथ आपके बाजार जायेंगे, आपके साथ खेलेंगे। आपसे कहानी सुनेंगे, आपके साथ आपके बिस्तर पर ही सोएंगे, सर्दी लगेगी तो गर्म कपडे मांगेंगे, गर्मी लगेगी तो उसकी भी शिकायत करेंगे। एक बच्चे के समान ही आपसे जिद्द भी करेंगे, तरह-तरह की खाने की वस्तुएं भी मांगेंगे। अच्छे कपडे भी पहनेंगे, आपसे लड़ेंगे भी और आपसे दुलार भी करेंगे। आपकी गोदी में बैठेंगे, आपकी बाते भी मांगेगे। इतना ही नहीं आप कहेंगे तो आपके कहे कार्य भी करेंगे। आपसे खिलोने भी मांगेंगे ना केवल अपने लिए बल्कि यदि आपके साथ बाजार में हैं तो किसी भी असहाय बच्चे के लिए भी खिलोने लेने के लिए कहेंगे। गरीबों असहायों की सेवा भी आपसे करवाएंगे। उनके लिए भोजन, वस्त्र आदि की व्यवस्था करवाएंगे। कोई गरीब यदि बीमार है तो उसके लिए आपसे दवा का प्रबन्ध भी करवाएंगे। जो लोग लड्डू गोपाल जी का ध्यान अपने पुत्र के सामान करते है लड्डू गोपाल जी उनके साथ भी पुत्र के सामान ही लाड करते हैं। घर-परिवार के सदस्य यदि लड्डू गोपाल जी के साथ घुल-मिल जाएँ तो यह इस तरह उनसे घुल-मिल जाते हैं कि उन पर किसी की डाँट का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता आप डांटते रहिये वह मुस्कराते रहेंगे। यदि आप किस बात पर रुष्ट हो जाएँ तो फिर वह आपको मनाने से भी पीछे नही हटते। हर पल खेलना, मस्ती करना, धमाल मचाना लड्डू गोपाल जी को बहुत प्रिय है। आपके साथ हर पल धमाल मचाते रहेंगे, फिर भी मन नही भरेगा।
लड्डू गोपाल जी के भक्त प्रेमियों यह मात्र काल्पनिक विवरण नही वरन एक शास्वत सत्य है। जो भी भक्त लज्जा और संकोच छोड़ कर लड्डू गोपाल जी में रम जाता है, लड्डू गोपाल जी भी उसमे उसी प्रकार से रम जाते हैं। लड्डू गोपाल जी के बहुत से भक्त लड्डू गोपाल जी को प्रसन्न करना भली प्रकार से जानते हैं किन्तु अधिकांश भक्त इस बात से अनभिज्ञ है कि लड्डू गोपाल जी की कृपा किस प्रकार प्राप्त करी जाए। लड्डू गोपाल जी को इस बात से कभी कुछ लेना देना नही कि आप उनकी पूजा, स्तुति किस प्रकार से कर रहे हो , उनको इससे भी कुछ लेना देना नही कि आप उन पर कितना पैसा ख़र्च कर रहे हो, वह इस बात पर कभी ध्यान नहीं देते कि आपने उनकी सुख-सुविधा का कितना ध्यान रखा है लड्डू गोपाल जी तो मात्र यह देखते हैं कि उनके प्रति आपकी भावना कितनी शुद्ध, श्रद्धा पूर्ण और पवित्र है। लड्डू गोपाल जी उस व्यक्ति से विशेष प्रसन्न रहते हैं जो अपने लिए नही दूसरों के लिए जीते हैं, जिनको अपने सुख की नही दूसरों के दुःख की अधिक चिंता रहती है, जो किसी के कष्ट को देखकर द्रवित होते हैं और उसका कष्ट दूर करने का प्रयास करते हैं। जो स्वयं भूंखे रहकर भी दूसरों का पेट भरते हैं। ऐसी सांसारिक तपस्या की अग्नि से शुद्ध हुआ व्यक्ति लड्डू गोपाल के पीछे नहीं दौड़ता बल्कि लड्डू गोपाल उसके पीछे दौड़ते हैं की मुझे अपना लो ! !
लड्डू गोपाल जी एक बार जिस पर प्रसन्न हो जाएं उसका जीवन हर प्रकार से सुरक्षित हो जाता है, सुख-समृद्धि, धन-वैभव की कोई कमी नही रहती। समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होती है, रोग, कष्ट, कलशों से मुक्ति प्राप्त होती है। अधिक क्या कहना उस व्यक्ति के सम्बन्ध में भला क्या कहना जिसके साथ स्वयं भगवान हो
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